यूरिया खेती में नाइट्रोजन देने का सबसे आम जरिया है, लेकिन अब किसानों के बीच दानेदार यूरिया के साथ नैनो यूरिया को लेकर भी चर्चा बढ़ गई है। दावा किया जाता है कि नैनो यूरिया कम मात्रा में पौधों तक नाइट्रोजन पहुंचाने में मदद कर सकता है और इसके इस्तेमाल से नाइट्रोजन के उपयोग की क्षमता बेहतर हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या नैनो यूरिया दानेदार यूरिया की जगह पूरी तरह ले सकता है?
दानेदार यूरिया क्या करता है?
दानेदार यूरिया खेत में नाइट्रोजन देने वाली प्रमुख खाद है। पौधों की बढ़वार और हरी पत्तियों के विकास के लिए नाइट्रोजन जरूरी होता है। किसान इसे आमतौर पर मिट्टी में डालकर इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन यूरिया का पूरा नाइट्रोजन पौधे इस्तेमाल नहीं कर पाते। पानी, सिंचाई और दूसरे कारणों से नाइट्रोजन का कुछ हिस्सा मिट्टी से बाहर चला जाता है। इसी वजह से नाइट्रोजन की उपयोग क्षमता बढ़ाना खेती के लिए महत्वपूर्ण है।
नैनो यूरिया में क्या अलग है?
नैनो यूरिया तरल रूप में होता है और इसे आमतौर पर पत्तियों पर स्प्रे करके पौधे तक नाइट्रोजन पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। IFFCO के अनुसार, नैनो यूरिया का उद्देश्य पौधे की नाइट्रोजन जरूरत को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा करना है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसान दानेदार यूरिया को पूरी तरह बंद कर दें। फसल, मिट्टी और नाइट्रोजन की जरूरत के हिसाब से दोनों का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है।
ICAR की रिसर्च क्या कहती है?
ICAR की एक हालिया स्टडी में पाया गया कि कुछ परिस्थितियों में कम मात्रा में सामान्य नाइट्रोजन के साथ नैनो यूरिया का स्प्रे करने पर फसल की उपज सामान्य पूरी नाइट्रोजन मात्रा के बराबर रह सकती है।
वहीं दूसरी ICAR रिसर्च में गेहूं पर पाया गया कि कम नाइट्रोजन के साथ नैनो यूरिया देने से कुछ स्थितियों में अच्छे परिणाम मिले, लेकिन केवल नैनो यूरिया पर निर्भर रहना हर स्थिति में सही नहीं रहा। एक अध्ययन में 65 किलो नाइट्रोजन/हेक्टेयर के साथ नैनो यूरिया देने पर पूरी अनुशंसित नाइट्रोजन मात्रा की तुलना में उपज 10.1% कम रही।
इससे साफ है कि नैनो यूरिया का इस्तेमाल फसल और सही मात्रा के हिसाब से करना जरूरी है।
तो किसान क्या करें?
दानेदार यूरिया और नैनो यूरिया में से किसी एक को हर फसल और हर खेत के लिए बेहतर बताना सही नहीं होगा। मिट्टी की जांच, फसल की जरूरत और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर नाइट्रोजन प्रबंधन करना ज्यादा बेहतर तरीका है।
कई शोधों में नैनो यूरिया को सामान्य यूरिया के साथ मिलाकर या उसकी कुछ मात्रा कम करके इस्तेमाल करने से अच्छे परिणाम मिले हैं। इसलिए किसानों को बिना सलाह के दानेदार यूरिया पूरी तरह बंद करके सिर्फ नैनो यूरिया पर निर्भर नहीं होना चाहिए।यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दानेदार यूरिया बेहतर है या नैनो यूरिया। असली सवाल है, किस फसल में, कितनी मात्रा में और किस समय इनका इस्तेमाल किया जाए।





