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Moody's की डराने वाली र‍िपोर्ट, पानी की क‍िल्‍लत से मुश्‍किल में पड़ जाएगी खेती क‍िसानी, कम उत्‍पादन से बढ़ेगी महंगाई

भीषण गर्मी के बीच पानी की बढ़ती क‍िल्‍लत (Water Shortage) से देश की साख (Economic Growth) तो ग‍िर ही सकती है, ये खेती क‍िसानी (Farming) के ल‍िए बेहद हान‍िकारक साब‍ित हो सकता है। इससे सामाजिक अशांति फै

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Indal· Correspondent

26 जून 2024· 4 min read

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Moody's की डराने वाली र‍िपोर्ट, पानी की क‍िल्‍लत से मुश्‍किल में पड़ जाएगी खेती क‍िसानी, कम उत्‍पादन से बढ़ेगी महंगाई

Moody's की डराने वाली र‍िपोर्ट, पानी की क‍िल्‍लत से मुश्‍किल में पड़ जाएगी खेती क‍िसानी, कम उत्‍पादन से बढ़ेगी महंगाई

भीषण गर्मी के बीच पानी की बढ़ती क‍िल्‍लत (Water Shortage) से देश की साख (Economic Growth) तो ग‍िर ही सकती है, ये खेती क‍िसानी (Farming) के ल‍िए बेहद हान‍िकारक साब‍ित हो सकता है। इससे सामाजिक अशांति फैल सकती है। ऐसे इसका सीधा असर प्रत‍ि व्‍यक्‍ति की आय पर पड़ेगा। ये बातें रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody's Ratings) ने मंगलवार को जारी अपनी र‍िपोर्ट 'भारत के समक्ष पर्यावरणीय जोख‍िम' में कही। मूडीज ने चेतावनी दी है कि अगर समस्‍या से न‍िपटने पर जोर नहीं द‍िया तो हालात बेहद खराब हो सकते हैं।

हाल के वर्षों में भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि देखी है। मूडीज के अनुसार, इस वर्ष (2024) में इसकी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो अन्य सभी जी-20 अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है। हालांकि, इस तीव्र आर्थिक वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण, भारत को जल तनाव का सामना करना पड़ रहा है और इससे इसकी संप्रभु ऋण शक्ति प्रभावित हो सकती है, वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने चेतावनी दी है। इस वर्ष की शुरुआत में मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को स्थिर दृष्टिकोण के साथ Baa3 पर बनाए रखा था।

पानी की क‍िल्‍लत, जलवायु पर‍िवर्तन से ब‍िगड़ेगी स्‍थ‍ित‍ि

मूडीज (Moody's) के अनुसार, "भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, तेजी से औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के साथ, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में पानी की उपलब्धता को कम कर रही है। जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चरम जलवायु घटनाओं, जैसे सूखा, गर्मी की लहरें और बाढ़ की वृद्धि से स्थिति और खराब हो जाएगी क्योंकि भारत जल आपूर्ति के लिए मानसून की बारिश पर बहुत अधिक निर्भर करता है।"

प्रत‍ि व्‍यक्‍त‍ि 1486 क्‍यूब‍िक मीटर पानी की उपलब्‍धता, 1,367 क्यूबिक मीटर रह जाने की आशंका

जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक जल उपलब्धता 2021 में पहले से ही कम 1,486 क्यूबिक मीटर से घटकर 2031 तक 1,367 क्यूबिक मीटर रह जाने की आशंका है। मूडीज ने बताया कि भारत जल प्रबंधन से जुड़े जोखिमों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील देशों में से एक है।

जी-20 अर्थव्यवस्थाओं में भारत में पानी सहित बुनियादी सेवाओं तक सबसे खराब पहुंच है, जो ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) कारकों के ऋण प्रभाव के आकलन के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। पिछले महीने, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी से जूझ रही है। इस साल की शुरुआत में बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह की जल समस्या का सामना करना पड़ा था।

यह भी पढ़ें- हरियाणा: गेहूं की बालियों में क्यों नहीं बने दाने?, जानिए क्या बोले किसान और एक्सपर्ट

वर्ष 2023 में खराब मानसून का कृषि पर असर पड़ा, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ गई। मूडीज ने चेतावनी दी, "पानी की आपूर्ति में कमी से कृषि उत्पादन और औद्योगिक संचालन बाधित हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप खाद्य कीमतों में मुद्रास्फीति और प्रभावित व्यवसायों और किसानों की आय में गिरावट आ सकती है, जबकि सामाजिक अशांति फैल सकती है। यह बदले में भारत के विकास में अस्थिरता को बढ़ा सकता है और अर्थव्यवस्था की झटकों को झेलने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।"

मूडीज ने आगे कहा कि अतीत में कृषि उत्पादन में रुकावट और मुद्रास्फीति के दबाव में वृद्धि के कारण खाद्य सब्सिडी में वृद्धि हुई है जिसने भारत के राजकोषीय घाटे में योगदान दिया है। इसके अलावा पानी की कमी कोयला बिजली जनरेटर और स्टील निर्माताओं के संचालन को बाधित कर सकती है। ये कंपनियां उत्पादन के लिए पानी पर बहुत अधिक निर्भर हैं और कमी उनके संचालन को बाधित कर सकती हैं, राजस्व सृजन में बाधा डाल सकती हैं और बदले में उनकी क्रेडिट ताकत को कम कर सकती है है।

मूडीज ने कहा कि भारत सरकार जल अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में निवेश कर रही है। साथ ही जो उद्योग पानी का अत्यधिक उपयोग करते हैं वे पानी के उपयोग की स्‍थ‍ित‍ि में सुधार करना चाहते हैं। इस तरह के प्रयास जल प्रबंधन जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं। भारत के उभरते टिकाऊ वित्त बाजार के विकास से कंपनियों को जल प्रबंधन में निवेश के वित्तपोषण में मदद मिल सकती है।

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