देश में मानसून अब धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम भारत से विदा हो रहा है, लेकिन जाते-जाते पूर्वी और मध्य भारत में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है और इसके और मजबूत होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में पूर्वी और मध्य भारत के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं, El Nino तेजी से मजबूत हुआ है और इसके 2027 तक बने रहने का अनुमान जताया गया है, जिससे आगे मौसम और खेती पर असर पड़ने की चिंता बढ़ सकती है।
15 फीसदी बारिश की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानसून सीजन में देशभर में बारिश की कमी करीब 15 फीसदी पर बनी हुई है। हालांकि, पिछले सप्ताह के मुकाबले कुछ इलाकों में स्थिति में सुधार हुआ है।
पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी 29 फीसदी से घटकर 27 फीसदी रह गई है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी कमी 28 फीसदी से घटकर 26 फीसदी हुई है। मध्य भारत में बारिश की कमी करीब 6 फीसदी पर बनी हुई है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में यह कमी 9 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो गई है।
खरीफ फसलों की बुवाई में बढ़त
18 सितंबर तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 1,103.9 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले बुवाई का अंतर भी थोड़ा कम हुआ है। अब कुल रकबा पिछले साल से करीब 15.1 लाख हेक्टेयर कम है, जबकि एक सप्ताह पहले यह अंतर 16 लाख हेक्टेयर था।
हालांकि, सभी फसलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। तिलहन की बुवाई पहली बार पिछले साल के मुकाबले थोड़ी ज्यादा हुई है, जबकि दलहन की बुवाई लगभग स्थिर बनी हुई है।
धान की बुवाई अभी भी पीछे
धान की बुवाई में कमी लगातार बनी हुई है। 18 सितंबर तक देश में करीब 429.3 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 445.9 लाख हेक्टेयर था। यानी धान का रकबा करीब 16.6 लाख हेक्टेयर कम है।
कपास की स्थिति भी पिछले साल के मुकाबले थोड़ी पीछे है। इस साल करीब 109.6 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 110.6 लाख हेक्टेयर था।
मध्य और पश्चिम भारत में जलाशयों की स्थिति बेहतर
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य और पश्चिम भारत में जलाशयों में पानी का भंडारण 10 साल के औसत से ऊपर बना हुआ है। इससे इन इलाकों में आगे की खेती और सिंचाई के लिए कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, दक्षिणी प्रायद्वीप में बुवाई और जलाशयों में पानी, दोनों की स्थिति अभी कमजोर बनी हुई है।
El Nino को लेकर चिंता क्यों?
रिपोर्ट में कहा गया है कि El Niño इस समय तेजी से मजबूत हो रहा है और यह लंबे समय तक, यहां तक कि 2027 तक बना रह सकता है। El Niño का असर भारत के मानसून पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में बारिश का पैटर्न खेती के लिए अहम रहेगा।
फिलहाल, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र से पूर्वी और मध्य भारत में बारिश की उम्मीद है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से अहम हो सकती है, लेकिन आगे मौसम कैसा रहता है, यह El Niño और मानसून की विदाई की रफ्तार पर काफी हद तक निर्भर करेगा।





