छत्रपति संभाजीनगर/जालना। मराठवाड़ा में बारिश की लंबी खामोशी ने खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में सूख चुकी सोयाबीन, पानी के अभाव में मुरझाता गन्ना, घटता बांधों का जलस्तर और रोजगार की चिंता से जूझते ग्रामीण परिवार सूखे की गंभीरता बयां कर रहे हैं। केंद्र सरकार के सूखा निरीक्षण दल ने छत्रपति संभाजीनगर और जालना जिलों के विभिन्न गांवों तथा जलस्रोतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर किसानों की समस्याएं जानीं।
देमनी में सोयाबीन की फसल बर्बाद, किसान ने बताई व्यथा
छत्रपति संभाजीनगर जिले के सूखाग्रस्त देमनी गांव में केंद्रीय दल ने खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी विनय गौड़ा जी.सी. उपस्थित थे। बारिश में लंबे अंतराल के कारण सूख चुकी सोयाबीन की फसल देखकर दल ने स्थानीय किसानों से बातचीत की।

किसान विकास देविदास शिंदे ने चार एकड़ में सोयाबीन की बुआई की थी। फसल के लिए अब तक लगभग 35 हजार रुपये खर्च करने के बावजूद बारिश की कमी से पूरी फसल बर्बाद हो गई। पिछले वर्ष जिस खेत से अच्छी पैदावार मिली थी, उसी खेत में इस बार सोयाबीन की फलियों में पर्याप्त दाने तक नहीं भर पाए।
किसानों ने मांग की कि फसलों के नुकसान का तत्काल पंचनामा कराकर उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
गलाटी बांध सूखा, गन्ने की फसल पर संकट
जालना जिले के अंबड तालुका स्थित गलाटी बांध का भी केंद्रीय दल ने निरीक्षण किया। बांध क्षेत्र के आसपास बारिश के अभाव में सूख रही गन्ने की फसल का जायजा लेकर खेती पर पड़े प्रभाव की जानकारी ली गई।

बांध पर निर्भर गांवों की पेयजल आपूर्ति, सिंचाई के लिए घटती जल उपलब्धता और मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले 106 परिवारों के सामने पैदा हुए संकट पर भी जानकारी जुटाई गई। बांध में पानी कम होने से खेती के साथ ग्रामीणों के रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
इसी दौरान दल ने कपास के खेत में रुककर कपास चुनने वाली महिलाओं से बातचीत की। उनसे फसल की स्थिति, कृषि मजदूरी और सूखे के कारण रोजगार पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में जानकारी ली गई।

दोबारा बुआई के बाद भी फसल नहीं बची
जालना जिले के बदनापुर तालुका के नानेगांव में केंद्रीय दल ने किसानों के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान विधायक नारायण कुंचे, राज्य के कृषि सचिव परिमल सिंह और जिलाधिकारी आशिमा मित्तल उपस्थित थे।
दल ने किसान अभिजित चव्हाण की तुअर की फसल का निरीक्षण किया और नुकसान की स्थिति जानी। किसानों ने बताया कि मानसून की शुरुआत में बारिश की उम्मीद के चलते बुआई की गई थी, लेकिन बाद में बारिश का लंबा अंतराल पड़ने से दोबारा बुआई करनी पड़ी।
'ग्रीन गोल्ड' किस्म की सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों ने बीज, खेत की तैयारी और कीटनाशकों के छिड़काव पर काफी खर्च किया। चार बार छिड़काव करने के बावजूद फसल को बचाया नहीं जा सका। किसानों के अनुसार, एक एकड़ में अब तक लगभग 22 से 23 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं।
अच्छी फलियां लगने और भरपूर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन बारिश की कमी से फसल सूख गई। किसानों ने आशंका जताई कि इस बार उत्पादन बेहद कम रहेगा। निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर फसल को लगभग 100 प्रतिशत नुकसान होने की स्थिति सामने आई।
खेती के लिए बैंक से कर्ज लेना, फसल बचाने के लिए लगातार खर्च करना और अंत में आंखों के सामने फसल को सूखते देखना किसानों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन गया है। बच्चों की शिक्षा, बेटियों के विवाह और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चिंता भी बढ़ गई है। कुछ किसानों ने खेती में निवेश के लिए अपने आभूषण तक बैंक में गिरवी रखकर कर्ज लिया है।
प्रत्यक्ष निरीक्षण के आधार पर केंद्र को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
केंद्रीय दल ने तीनों स्थानों पर फसलों की स्थिति, जल उपलब्धता, कृषि मजदूरों के रोजगार और ग्रामीण परिवारों की समस्याओं की जानकारी जुटाई। किसानों ने नुकसान के अनुरूप आर्थिक सहायता और समय पर राहत मिलने की अपेक्षा व्यक्त की।
बारिश में लंबे अंतराल से फसलों की बर्बादी, सिंचाई और पेयजल की समस्या तथा ग्रामीण रोजगार पर पड़ते प्रभाव ने मराठवाड़ा में सूखे की गंभीरता को उजागर किया है। केंद्रीय दल इस दौरे के दौरान किए गए प्रत्यक्ष निरीक्षण और किसानों से प्राप्त जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। अब प्रभावित किसानों की नजर इस बात पर है कि निरीक्षण के बाद उन्हें कितनी और कितनी जल्दी राहत मिलती है।
(महाराष्ट्र से सिद्धनाथ माने की रिपोर्ट)





