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महाराष्ट्र की 265 तहसीलों में सूखा, किसानों ने मांगी कर्जमाफी और मुआवजा

महाराष्ट्र में लगातार दूसरे खरीफ सीजन पर मौसम की मार ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है। पिछले साल अतिवृष्टि से फसलें बर्बाद हुई थीं, तो इस बार बारिश की कमी और सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। राज्य सरकार ने 32 जिलों की 265 तहसीलों में ‘ट्रिगर-1’ लागू कर सूखे जैसी स्थिति घोषित की है। इसमें लातूर की सभी 10 तहसीलें भी शामिल हैं।

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News Potli·News Potli Desk·26 Sep 2026

महाराष्ट्र की 265 तहसीलों में सूखा, किसानों ने मांगी कर्जमाफी और मुआवजा

महाराष्ट्र में लगातार दूसरे खरीफ सीजन पर मौसम की मार ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है। पिछले साल अतिवृष्टि से फसलें बर्बाद हुई थीं, तो इस बार बारिश की कमी और सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। राज्य सरकार ने 32 जिलों की 265 तहसीलों में ‘ट्रिगर-1’ लागू कर सूखे जैसी स्थिति घोषित की है। इसमें लातूर की सभी 10 तहसीलें भी शामिल हैं। सरकार ने राहत के लिए कई उपायों का ऐलान किया है, लेकिन किसान सभा का कहना है कि सिर्फ सूखा घोषित करने से किसानों की परेशानी दूर नहीं होगी। किसानों को उनकी वास्तविक फसल क्षति के आधार पर ठोस आर्थिक मदद, कर्जमाफी और पर्याप्त मुआवजा देना जरूरी है।

265 तहसीलों में लागू होंगे राहत के उपाय

सूखा प्रभावित तहसीलों में सरकार ने 12 तरह के राहत उपाय और रियायतें लागू की हैं। इनमें जमीन के राजस्व में छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन और कृषि कर्ज की वसूली पर रोक जैसे कदम शामिल हैं।

कृषि पंपों को लेकर भी राहत दी गई है। 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ किया जा चुका है, जबकि इससे अधिक क्षमता वाले पंपों के लिए तय नियमों के मुताबिक राहत दी जाएगी। सूखा प्रभावित गांवों में किसानों के कृषि पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटने के निर्देश भी दिए गए हैं।

फसल नुकसान का पंचनामा होगा

सरकार ने सूखा घोषित तहसीलों में फसल नुकसान के पंचनामे तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए हैं। खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति दर्ज करने के साथ फोटो और GPS कोऑर्डिनेट्स भी लिए जाएंगे। इसके आधार पर नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

हालांकि, फसल नुकसान के लिए किसानों को कितनी सीधी आर्थिक सहायता मिलेगी, इसका फैसला अलग शासनादेश के जरिए किया जाएगा। ऐसे में किसानों की नजर अब पंचनामे और सरकार की अगली घोषणा पर है।

किसान सभा ने कर्जमाफी बढ़ाने की मांग की

किसान सभा का कहना है कि लगातार दो खरीफ सीजन खराब होने से किसान भारी आर्थिक संकट में हैं। खेती से आमदनी नहीं हुई, लेकिन लागत, कर्ज और परिवार का खर्च बना हुआ है।

किसान सभा ने मांग की है कि सरकार की कर्जमाफी में 2025 के बाद बकाया हुए सभी पात्र किसानों को भी शामिल किया जाए। वहीं नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को सिर्फ 50 हजार रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है। ऐसे किसानों के लिए कम से कम 2 लाख रुपये तक कर्जमाफी या कर्ज राहत देने की मांग की गई है।

NDRF की मदद को बताया अपर्याप्त

किसान सभा ने सूखा राहत के लिए NDRF के मानकों के तहत मिलने वाली सहायता पर भी सवाल उठाया है। उसके मुताबिक, इन मानकों में बारानी फसलों के लिए 8,500 रुपये, सिंचित फसलों के लिए 17,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान है।

किसान सभा का कहना है कि मौजूदा लागत और वास्तविक नुकसान को देखते हुए यह रकम पर्याप्त नहीं है। इससे किसान की पूरी लागत और अगले सीजन की खेती पर पड़े आर्थिक असर की भरपाई नहीं हो सकती।

बीमा की संरक्षित राशि को मुआवजे का आधार बनाने की मांग

किसान सभा ने मांग की है कि किसान ने जिस फसल का बीमा कराया है, उसकी बीमा संरक्षित राशि को न्यूनतम मुआवजे का आधार बनाया जाए। अगर वास्तविक नुकसान इससे ज्यादा है, तो अतिरिक्त मुआवजे की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाए।

संगठन ने फसल बीमा में हटाए गए ट्रिगर को दोबारा लागू करने की मांग भी की है, ताकि किसानों को बीमा का लाभ मिल सके।

पानी, चारा और विद्यार्थियों को भी राहत

सूखा प्रभावित इलाकों में जरूरत के हिसाब से पीने के पानी के टैंकर, पशुओं के लिए चारा और पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। रोजगार बढ़ाने के लिए रोजगार गारंटी योजना के कामों के नियमों में भी शिथिलता दी जाएगी।

सूखे का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर न पड़े, इसके लिए स्कूल और कॉलेज के परीक्षा शुल्क में छूट देने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जलसंधारण के काम शुरू करने और खेती पर निर्भर किसानों व मजदूरों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

लातूर की सभी 10 तहसीलें सूखा सूची में

लातूर जिले की लातूर, औसा, अहमदपुर, निलंगा, उदगीर, चाकूर, रेणापुर, शिरूर अनंतपाल, देवणी और जळकोट समेत सभी 10 तहसीलें सूखा प्रभावित सूची में शामिल हैं।

अब किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद फसल पंचनामे जल्द पूरे होने और वास्तविक नुकसान के आधार पर आर्थिक सहायता मिलने पर टिकी है। किसान सभा का कहना है कि सूखे की घोषणा राहत की शुरुआत है, लेकिन सरकार की असली परीक्षा तब होगी, जब संकट में फंसे किसानों तक पर्याप्त आर्थिक मदद पहुंचेगी।

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