महाराष्ट्र के किसानों के लिए इस बार खरीफ का मौसम मुश्किल भरा रहा है। बारिश कम होने से कई इलाकों में फसलें सूखने लगीं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। अब राज्य सरकार ने 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। यानी राज्य की करीब 74 फीसदी तहसीलें सूखे की चपेट में हैं। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए फसल कर्ज के पुनर्गठन, जमीन के राजस्व में छूट और कृषि कर्ज की वसूली टालने जैसे कई फैसले लिए हैं।
25 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी पर लागू हुआ ‘Trigger-1’
राज्य सरकार ने Drought Management Code के तहत ‘Trigger-1’ लागू किया है। यह सूखा प्रबंधन व्यवस्था का पहला चरण है। जब बारिश में 25 फीसदी से ज्यादा कमी हो और लगातार 21 दिन तक सूखा बना रहे, तब इसे लागू किया जाता है।
कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक, जून से बारिश में कमी और दूसरी वजहों से 32 जिलों की 265 तहसीलों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। इनमें सोलापुर, अहिल्यानगर, नासिक, लातूर, बीड, बुलढाणा, अमरावती, यवतमाल, नागपुर और चंद्रपुर जैसे जिले शामिल हैं।
किसानों को कर्ज और बिजली में राहत
सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों के फसल कर्ज का पुनर्गठन किया जाएगा। कृषि से जुड़े कर्ज की वसूली भी कुछ समय के लिए टाली जाएगी। जमीन के राजस्व में छूट देने का भी फैसला हुआ है।
कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत दी गई है। सरकार के मुताबिक 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ किया जा चुका है। अब इससे ज्यादा क्षमता वाले पंपों को भी तय नियमों के मुताबिक राहत दी जाएगी।
खेतों में नुकसान का होगा सर्वे
सरकार ने प्रभावित तहसीलों में फसल नुकसान का सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सर्वे के दौरान फसल की स्थिति की तस्वीरें और GPS लोकेशन भी दर्ज की जाएगी, ताकि खेत में हुए नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार हो सके।
फसल नुकसान के लिए किसानों को कितनी आर्थिक मदद मिलेगी, इसका फैसला बाद में अलग शासनादेश के जरिए किया जाएगा। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार आर्थिक सहायता की घोषणा करेगी।
कम बारिश से बढ़ी किसानों की परेशानी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 18 सितंबर तक महाराष्ट्र में 755.9 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 932.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी बारिश में करीब 18.8 फीसदी की कमी रही।
छत्रपति संभाजीनगर संभाग में सामान्य 613.1 मिमी के मुकाबले सिर्फ 424.5 मिमी बारिश हुई, यानी यहां 30.8 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। पुणे और नासिक संभाग में भी करीब 30 फीसदी, जबकि अमरावती और नागपुर संभाग में करीब 27 फीसदी बारिश की कमी रही। अमरावती, सोलापुर और लातूर समेत कम से कम छह जिलों में बारिश की कमी 40 से 50 फीसदी तक रही।
सोयाबीन, कपास, तुअर समेत खरीफ फसलों पर असर
कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। राज्य में किसान सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंग और उड़द जैसी फसलें उगाते हैं। कई जिलों में किसानों ने फसल सूखने और उत्पादन प्रभावित होने की शिकायत की है। कम बारिश के बीच फसलों में कीट और रोगों का प्रकोप भी बढ़ा है।
पानी, चारा और रोजगार की भी व्यवस्था
सूखा प्रभावित गांवों में जरूरत के मुताबिक पानी के टैंकर भेजे जाएंगे। लोगों और पशुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था के साथ पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराया जाएगा।
ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के लिए रोजगार गारंटी योजना के नियमों में भी ढील दी जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा काम शुरू किए जा सकें। खेती पर निर्भर किसानों और मजदूरों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराने तथा जल संरक्षण के काम शुरू करने की भी योजना है।
इसके अलावा स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का फैसला भी लिया गया है।
इस बीच, किसानों को अब सरकार की अगली घोषणा का इंतजार है, जिसमें फसल नुकसान के आधार पर मिलने वाली आर्थिक सहायता की जानकारी दी जाएगी। राज्य में लगातार कम बारिश और फसल नुकसान के बीच किसानों की मांग है कि राहत सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि समय पर उनके खेत और परिवार तक पहुंचे।





