पशुओं में होने वाली लंपी बीमारी (Lumpy Skin Disease) किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। यह बीमारी खासकर गाय और दूसरे मवेशियों को प्रभावित करती है। अगर समय रहते इसके लक्षण पहचान लिए जाएं और संक्रमित पशु को अलग कर दिया जाए, तो बीमारी को फैलने से रोकने में काफी मदद मिल सकती है।
लंपी के क्या लक्षण हैं?
लंपी के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4 से 14 दिन बाद दिखाई दे सकते हैं। पशु को तेज बुखार हो सकता है, जो 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके अलावा शरीर पर 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें निकल सकती हैं और गर्दन की गांठों में सूजन आ सकती है।
बीमार पशु की नाक बहना, आंखों में सूजन और ज्यादा आंसू आना, सुस्ती, भूख कम लगना और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। दूध देने वाले पशुओं में दूध कम हो सकता है। गर्भवती पशुओं में गर्भपात का खतरा भी रहता है। कुछ मामलों में पैरों और शरीर के दूसरे हिस्सों में सूजन भी आ सकती है।
लंपी बीमारी कैसे फैलती है?
लंपी मुख्य रूप से खून चूसने वाले कीड़ों, जैसे मच्छर, मक्खी और किलनी के जरिए फैलती है। संक्रमित पशु को काटने के बाद जब यही कीड़े किसी स्वस्थ पशु को काटते हैं तो संक्रमण फैल सकता है।
बीमार पशु के संपर्क और उसकी आवाजाही से भी संक्रमण दूसरे पशुओं तक पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए बीमारी का शक होने पर पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखना जरूरी है।
पशुओं को लंपी से कैसे बचाएं?
लंपी से बचाव के लिए पशुओं की नियमित निगरानी करें और शरीर पर गांठ, बुखार या दूसरे लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से सलाह लें। बीमारी का शक होने पर पशु को अलग रखें।
साथ ही पशुशाला के आसपास मक्खी, मच्छर और किलनी पर नियंत्रण रखें। अपने क्षेत्र में चल रहे लंपी टीकाकरण कार्यक्रम के तहत पशुओं का टीकाकरण भी जरूर करवाएं।
समय पर लक्षण पहचानना, संक्रमित पशु को अलग रखना और कीड़ों पर नियंत्रण करना लंपी को फैलने से रोकने में अहम कदम हैं।
वीडियो देखिए-





