नई दिल्ली। देश में खेती योग्य जमीन लगातार थोड़ी कम हो रही है, लेकिन किसानों ने आधुनिक तकनीकों और बेहतर खेती के तरीकों की मदद से उसी जमीन से ज्यादा उत्पादन लेना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि खेती का कुल रकबा, फसल सघनता और अनाज उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में ये जानकारी दी।
खेती की जमीन घटी, लेकिन खेती बढ़ी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में खेती योग्य जमीन 2022-23 में 179.98 मिलियन हेक्टेयर थी, जो 2024-25 में घटकर 179.43 मिलियन हेक्टेयर रह गई। इसके बावजूद किसानों ने एक ही खेत में साल में एक से ज्यादा फसलें उगाकर खेती का दायरा बढ़ाया है। इसी कारण ग्रॉस क्रॉप्ड एरिया (कुल बोया गया क्षेत्र) 2014-15 के 198.28 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 225.19 मिलियन हेक्टेयर हो गया।
एक खेत से कई फसलें, बढ़ी फसल सघनता
सरकार के अनुसार, आधुनिक खेती की तकनीक, बेहतर सिंचाई और सरकारी योजनाओं के चलते किसान अब एक ही खेत में साल में दो या उससे अधिक फसलें ले रहे हैं। इससे क्रॉपिंग इंटेंसिटी (फसल सघनता) 2014-15 के 142.2 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 159.7 प्रतिशत पहुंच गई है।
अनाज और बागवानी उत्पादन में भी बढ़ोतरी
खेती के बेहतर तरीकों का असर उत्पादन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। देश का खाद्यान्न उत्पादन 2014-15 के 252.02 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 के अग्रिम अनुमान के अनुसार 376.56 मिलियन टन हो गया है। वहीं बागवानी फसलों का उत्पादन भी 280.98 मिलियन टन से बढ़कर 377.77 मिलियन टन तक पहुंच गया है।
सरकार का कहना है कि सीमित कृषि भूमि के बावजूद आधुनिक तकनीक, बेहतर कृषि प्रबंधन और प्रभावी नीतियों की मदद से किसान अधिक उत्पादन लेने में सफल हो रहे हैं। इससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
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