नई दिल्ली। खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई इस साल पिछले वर्ष के मुकाबले पीछे चल रही है। 14 अगस्त 2026 तक देश में कुल 1016.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 1037.52 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। यानी इस साल अब तक कुल रकबा 20.95 लाख हेक्टेयर कम है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई है।
हालांकि, कई फसलों और राज्यों में बुवाई का रकबा बढ़ा भी है। खासकर कुछ दालों, ज्वार, बाजरा, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल का रकबा पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है। वहीं चावल, मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंग, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख फसलों का रकबा घटा है।
धान का रकबा 14.37 लाख हेक्टेयर कम
धान की खेती इस साल 379.07 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 393.44 लाख हेक्टेयर था। यानी धान का रकबा 14.37 लाख हेक्टेयर घटा है। सामान्य क्षेत्र 412 लाख हेक्टेयर है।
दालों में मामूली कमी, उड़द का रकबा बढ़ा
दालों का कुल रकबा 108.14 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 108.49 लाख हेक्टेयर से 0.35 लाख हेक्टेयर कम है।
दालों में अरहर का रकबा 40.31 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 42.01 लाख हेक्टेयर से 1.69 लाख हेक्टेयर कम है। वहीं उड़द का रकबा 23.52 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 20.79 लाख हेक्टेयर से 2.73 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
मूंग का रकबा 32.05 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 33.42 लाख हेक्टेयर से 1.37 लाख हेक्टेयर कम है। कुल्थी का रकबा 0.19 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.18 लाख हेक्टेयर? — आंकड़ों में कुल्थी का अंतर 0.01 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी बताया गया है। मोठ का रकबा 8.92 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 8.69 लाख हेक्टेयर से 0.23 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। अन्य दालों का रकबा 3.14 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 3.40 लाख हेक्टेयर से 0.27 लाख हेक्टेयर कम है।
मक्के का रकबा 3.67 लाख हेक्टेयर घटा
श्री अन्न और पोषक अनाज का कुल रकबा 172.96 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 177.13 लाख हेक्टेयर से 4.17 लाख हेक्टेयर कम है।
इसमें ज्वार का रकबा 13.30 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 12.61 लाख हेक्टेयर से 0.69 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। बाजरा 63.98 लाख हेक्टेयर में बोया गया है, जो पिछले साल से 0.69 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
वहीं रागी का रकबा 5.26 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 3.46 लाख हेक्टेयर से 1.80 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। छोटे मिलेट्स का रकबा 3.83 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.92 लाख हेक्टेयर हुआ है।
दूसरी ओर मक्का का रकबा 88.39 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 92.06 लाख हेक्टेयर था। यानी मक्के की बुवाई 3.67 लाख हेक्टेयर कम हुई है।
तिलहन का रकबा 0.89 लाख हेक्टेयर घटा
तिलहन की खेती का कुल रकबा 184.46 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 185.36 लाख हेक्टेयर से 0.89 लाख हेक्टेयर कम है।
इसमें मूंगफली का रकबा 48.03 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 47.01 लाख हेक्टेयर से 1.02 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
वहीं सोयाबीन का रकबा 120.84 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 122.61 लाख हेक्टेयर से 1.76 लाख हेक्टेयर कम है।
सूरजमुखी का रकबा 1.06 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 0.61 लाख हेक्टेयर से 0.46 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। तिल का रकबा 10.35 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 8.73 लाख हेक्टेयर से 1.63 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
काला तिल का रकबा 0.24 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 0.16 लाख हेक्टेयर था। वहीं अरंडी का रकबा 3.83 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.19 लाख हेक्टेयर? — तालिका में अरंडी के लिए 2026 का 3.83 लाख हेक्टेयर और 2025 का 6.19 लाख हेक्टेयर दिया गया है, यानी इसमें 2.35 लाख हेक्टेयर की कमी है। अन्य तिलहनों का रकबा 0.10 लाख से घटकर 0.06 लाख हेक्टेयर रहा है।
गन्ने का रकबा भी थोड़ा घटा
गन्ने की खेती का रकबा इस साल 58.31 लाख हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल 58.62 लाख हेक्टेयर था। यानी इसमें 0.31 लाख हेक्टेयर की कमी हुई है। सामान्य क्षेत्र 54.20 लाख हेक्टेयर है।
जूट और मेस्टा की बुवाई बढ़ी
जूट एवं मेस्टा का रकबा इस साल 6.34 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 6.23 लाख हेक्टेयर से 0.11 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। हालांकि सामान्य क्षेत्र 6.40 लाख हेक्टेयर है।
कपास का रकबा करीब 1 लाख हेक्टेयर घटा
कपास की बुवाई इस साल 107.30 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 108.26 लाख हेक्टेयर थी। यानी कपास का रकबा 0.96 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। सामान्य क्षेत्र 125.51 लाख हेक्टेयर है।





