केंद्र सरकार ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 में उर्वरक सब्सिडी देने के लिए उसके पास पर्याप्त धन उपलब्ध है और किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार ने संसद में बताया कि 13 जुलाई 2026 तक उर्वरक सब्सिडी पर 70,709 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जो इस वर्ष के कुल बजट 1.77 लाख करोड़ रुपये का लगभग 40 प्रतिशत है।
राज्यसभा में लिखित जवाब में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि सरकार के पास सब्सिडी भुगतान के लिए पर्याप्त राशि है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम भी उठाए जा रहे हैं।
खरीफ सीजन के लिए बढ़ाई गई सब्सिडी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने खरीफ 2026 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना के तहत 41,533.81 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि रबी 2025-26 के मुकाबले लगभग 3,581 करोड़ रुपये अधिक है।
सरकार का कहना है कि इससे फॉस्फेट और पोटाश (P&K) उर्वरक किसानों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
यूरिया आयात के लिए पहले से की गई तैयारी
खरीफ सीजन में खाद की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने पहले से ही यूरिया आयात की व्यवस्था कर ली है। अप्रैल 2026 में 25 लाख टन और जून 2026 में 17.7 लाख टन यूरिया के लिए वैश्विक टेंडर जारी किए गए हैं।
इसके अलावा भारत और ओमान के बीच पांच साल का समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत को अगले पांच वर्षों में 45 लाख टन यूरिया मिलेगा।
नए देशों से भी होगी खाद की खरीद
सरकार अब कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भरता कम करने के लिए नए आपूर्तिकर्ता देशों की तलाश कर रही है। इसके लिए विदेशों में भारतीय दूतावासों की मदद ली जा रही है, ताकि खाद की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए।
देश में खाद का पर्याप्त भंडार
सरकार ने बताया कि 15 जुलाई 2026 तक देश में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद था। इसमें:
- यूरिया: 69.59 लाख टन
- डीएपी (DAP): 16.45 लाख टन
- म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP): 8.67 लाख टन
- एनपीकेएस (NPKS): 45.24 लाख टन
इसके अलावा देश में 22.13 लाख टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) का भी भंडार है, जिसे डीएपी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
पिछले तीन साल में बढ़ा सब्सिडी खर्च
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी पर खर्च लगातार बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में यह खर्च 1.95 लाख करोड़ रुपये, 2024-25 में 1.77 लाख करोड़ रुपये और 2025-26 में बढ़कर 2.17 लाख करोड़ रुपये रहा।
सरकार का कहना है कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बावजूद किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।





