कर्नाटक में गन्ना किसानों ने फिलहाल अपना आंदोलन रोक दिया है। किसानों ने सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 26 नवंबर तक का समय दिया है। उनकी प्रमुख मांगों में गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाना और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाना शामिल है। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद आंदोलन रोकने का फैसला लिया गया।
गन्ने का दाम ₹5,500 प्रति टन करने की मांग
किसान खेती की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए गन्ने का FRP बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य कम से कम ₹4,500 से ₹5,500 प्रति टन किया जाए। केंद्र सरकार ने 2026-27 के पेराई सीजन के लिए गन्ने का FRP ₹3,650 प्रति टन तय किया है। यह सीजन अक्टूबर से शुरू हुआ है।
चीनी का MSP ₹31 से बढ़ाकर ₹60 करने की मांग
गन्ना किसानों की दूसरी प्रमुख मांग चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाना है। फिलहाल चीनी का MSP ₹31 प्रति किलो है। किसान इसे बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए गन्ने और चीनी दोनों के दाम बढ़ाए जाने चाहिए।
किसानों की मांगों पर विचार करेगी समिति
किसानों की मांगों पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है। यह समिति गन्ना किसानों की समस्याओं का अध्ययन करेगी और उनके समाधान के लिए सरकार को सुझाव देगी।
किसानों ने फिलहाल आंदोलन रोक दिया है, लेकिन सरकार को 26 नवंबर तक का समय दिया है। अब देखना होगा कि समिति की सिफारिशों और सरकार के फैसले से किसानों की मांगों पर क्या असर पड़ता है।





