कर्नाटक में गन्ने के दाम को लेकर किसानों की नाराजगी के बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए दिल्ली आने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) को लेकर किसानों की जो भी मांग या शिकायत है, उस पर सरकार उनसे सीधे बातचीत करने के लिए तैयार है। जोशी ने किसानों से सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय दिल्ली आकर अपनी बात रखने की अपील की है।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक राज्य रैथा सेना ने हुबली में प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसान गन्ने का दाम बढ़ाने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
केंद्र ने गन्ने की FRP कितनी तय की है?
केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन के लिए गन्ने की FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय की है। यह 10.25 फीसदी की बेसिक शुगर रिकवरी पर लागू होगी। 10.25 फीसदी से ज्यादा रिकवरी होने पर हर 0.1 फीसदी की अतिरिक्त रिकवरी पर ₹3.56 प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा।
केंद्र की यह FRP 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सीजन के लिए है। पिछले सीजन यानी 2025-26 में FRP ₹355 प्रति क्विंटल थी।
कर्नाटक के किसान कितना दाम मांग रहे हैं?
कर्नाटक के किसान मौजूदा दाम से काफी ज्यादा कीमत की मांग कर रहे हैं। कर्नाटक राज्य रैथा सेना और हसिरू सेना से जुड़े किसान गन्ने के लिए ₹5,500 प्रति टन, यानी करीब ₹550 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
वहीं, कर्नाटक फार्मर्स ऑर्गनाइजेशंस फेडरेशन ने केंद्र से ₹4,500 प्रति टन FRP और राज्य सरकार से ₹800 प्रति टन अतिरिक्त SAP की मांग रखी है। इस तरह उनकी कुल मांग ₹5,300 प्रति टन बैठती है।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत बढ़ी है और गन्ने की खेती में मजदूरी, खाद, सिंचाई समेत कई खर्च बढ़ गए हैं। इसी वजह से वे मौजूदा कीमत को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
'दिल्ली आइए, हम आपकी बात सुनेंगे'
प्रह्लाद जोशी ने एक वीडियो संदेश में किसान नेताओं से कहा कि वे किसी भी समय दिल्ली आकर सरकार से बातचीत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को सड़कों पर प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है और सरकार उनकी समस्याएं सुनने के लिए तैयार है।
मंत्री के मुताबिक, किसान नेता फरवरी 2026 में भी उनसे मिले थे और गन्ने की FRP बढ़ाने की मांग रखी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने मई 2026 में 2026-27 सीजन के लिए FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय की थी।
FRP तय करने में राज्यों की राय भी शामिल
जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार FRP अकेले तय नहीं करती। इसे तय करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के साथ राज्य सरकारों और दूसरे संबंधित पक्षों से मिले सुझावों को भी देखा जाता है। केंद्र सरकार के मुताबिक FRP तय करते समय राज्य सरकारों से भी सलाह ली जाती है।
हुबली में प्रदर्शन की तैयारी
इस बीच कर्नाटक राज्य रैथा सेना ने हुबली में प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसान नेता प्रह्लाद जोशी के आवास और कार्यालय तक मार्च करने की तैयारी में हैं।
किसानों की मांगों में गन्ने का दाम बढ़ाना, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना और गन्ने से जुड़े दूसरे मुद्दों का समाधान शामिल है। प्रदर्शन में कर्नाटक के अलावा दूसरे राज्यों के किसान संगठनों के नेता भी शामिल हो सकते हैं।
प्रदर्शन को देखते हुए हुबली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और जोशी के आवास और कार्यालय के आसपास बैरिकेडिंग की गई है।
कुछ राज्यों में FRP से ज्यादा मिलता है गन्ने का दाम
केंद्र की FRP पूरे देश के लिए तय होती है, लेकिन कुछ गन्ना उत्पादक राज्य अपनी State Advised Price यानी SAP भी तय करते हैं। फिलहाल उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड ऐसे प्रमुख राज्य हैं जहां SAP केंद्र की FRP से ज्यादा रही है।
जैसे उपलब्ध 2025-26 सीजन की दरों के मुताबिक पंजाब में ₹416 प्रति क्विंटल की SAP है, जो 2025-26 सीजन में देश में सबसे ज्यादा बताई गई है। वहीं हरियाणा में अगेती किस्म के लिए ₹415 और मध्यम/पिछेती किस्म ₹408 प्रति क्विंटल है। जबकि उत्तराखंड में अगेती किस्म के लिए ₹405 और सामान्य किस्म ₹395 प्रति क्विंटल तय है। और उत्तर प्रदेश में अगेती किस्म के लिए ₹400, सामान्य किस्म ₹390 और रिजेक्टेड/कम गुणवत्ता वाली किस्म ₹355 प्रति क्विंटल तय की गई है।
कर्नाटक में फिलहाल इन चार राज्यों की तरह अलग SAP तय नहीं होती। वहां किसानों की मांग सीधे गन्ने की कीमत और केंद्र की FRP के अलावा राज्य स्तर से अतिरिक्त भुगतान को लेकर है।
ऐसे ही महाराष्ट्र में भी अलग SAP नहीं है। यहां गन्ने के भुगतान का आधार केंद्र की FRP है, जो 2026-27 सीजन के लिए ₹365 प्रति क्विंटल यानी ₹3,650 प्रति टन तय की गई है।





