गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर कर्नाटक में किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसान गन्ने का दाम बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति टन करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने किसानों से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गन्ने की कीमतों का मुद्दा सिर्फ कर्नाटक का नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों से जुड़ा है। इसे सुलझाने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार और महाराष्ट्र के नेताओं के साथ बातचीत कर रही है।
दोनों के हितों का ध्यान जरूरी
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है, जिससे गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिले और चीनी मिलों का कामकाज भी प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि इस साल बारिश की कमी के कारण गन्ने की पैदावार पर भी असर पड़ा है।
शिवकुमार के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में चीनी और गन्ने की कीमतों में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हुई है। राज्य सरकार पहले भी गन्ना किसानों को आर्थिक मदद देने का ऐलान कर चुकी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी सहायता देगी। उन्होंने किसानों से कानून अपने हाथ में नहीं लेने और अपनी मांगें बातचीत के जरिए रखने की अपील की। सरकार ने किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए बैठक भी बुलाई है।
क्या हैं गन्ना किसानों की मांगें?
गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग को लेकर उत्तरी कर्नाटक के किसान आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बेलगावी के पास पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे को दो दिनों तक जाम रखा था। अब प्रदर्शनकारी हुबली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास की ओर पदयात्रा कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि उनकी मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। हालांकि, उनकी समस्याओं की जांच के लिए एक समिति बनाई गई है।
किसानों की तीन प्रमुख मांगें
गन्ना किसानों की तीन प्रमुख मांगें हैं। उनकी मांग है कि गन्ने का दाम बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति टन किया जाए, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम की जाए और इथेनॉल की कीमतों में संशोधन किया जाए। किसानों का कहना है कि इन मांगों पर फैसला होने से उन्हें खेती की लागत निकालने और बेहतर कमाई करने में मदद मिलेगी। वहीं, राज्य सरकार किसानों और चीनी मिलों, दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत के जरिए इस मामले का समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।





