नारियल की खेती करने वाले किसानों के लिए ऐसी किस्म ज्यादा फायदेमंद हो सकती है, जिससे सिर्फ नारियल ही नहीं बल्कि नारियल पानी, सूखा नारियल और नीरा जैसे अलग-अलग उत्पादों के लिए भी उत्पादन लिया जा सके। ऐसी ही एक बहुउपयोगी किस्म है Kalpa Nakshatra, जिसे ICAR-CPCRI, कासरगोड ने विकसित किया है।
Kalpa Nakshatra एक D × T Hybrid है। इसे Chowghat Orange Dwarf और West African Tall के क्रॉस से विकसित किया गया है। इसके पेड़ Semi-tall होते हैं और इनका Canopy अपेक्षाकृत compact और गोल आकार का होता है।
साल में करीब 151 नारियल
इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका उत्पादन है। ICAR-CPCRI के मुताबिक, Kalpa Nakshatra से एक पेड़ से सालाना औसतन 151 नारियल मिल सकते हैं। इसके अलावा इससे करीब 31.3 किलो सूखा नारियल प्रति पेड़ प्रति साल का उत्पादन दर्ज किया गया है।
यानी किसान इस किस्म को सिर्फ सूखा नारियल बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
नारियल पानी के लिए भी अच्छी किस्म
Kalpa Nakshatra के कच्चे नारियल में पानी की मात्रा भी अच्छी है। ICAR के अनुसार, एक नारियल में करीब 432.5 मिलीलीटर पानी पाया गया और इसकी गुणवत्ता 5.9° Brix TSS दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि इस किस्म के नारियल का इस्तेमाल नारियल पानी के लिए भी किया जा सकता है।
नीरा के लिए भी उपयोगी
इस किस्म से नीरा भी अच्छी मात्रा में मिल सकता है। ICAR-CPCRI के आंकड़ों के मुताबिक, एक पुष्पक्रम से करीब 70 लीटर रस का उत्पादन दर्ज किया गया है। इसी रस से नीरा तैयार किया जाता है।
इसी वजह से Kalpa Nakshatra को नारियल पानी, सूखा नारियल और नीरा के लिए बहुउपयोगी नारियल किस्म बताया गया है।
Kerala में खेती के लिए सिफारिश
ICAR-CPCRI के अनुसार, Kalpa Nakshatra को Kerala में खेती के लिए बहुउपयोगी किस्म के तौर पर recommend किया गया है। इसे Kerala State Variety Release Committee ने भी खेती के लिए जारी किया है।
यानी नारियल की खेती में अगर किसान ऐसी किस्म चाहते हैं, जिससे नारियल पानी, सूखा नारियल और नीरा जैसे अलग-अलग उत्पादों के लिए इस्तेमाल किया जा सके, तो Kalpa Nakshatra एक ऐसी विकसित किस्म है जिसे ICAR-CPCRI ने इसी बहुउपयोगी इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है।





