अगर आप कम लागत में लंबे समय तक कमाई देने वाली फसल की तलाश कर रहे हैं, तो काली मिर्च की खेती आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती है। एक बार पौधा लगाने के बाद यह करीब 15 से 16 साल तक उत्पादन देता है। यही वजह है कि इसे मसाला फसलों में सबसे लाभदायक फसलों में गिना जाता है। भारत में काली मिर्च की सबसे ज्यादा खेती केरल और कर्नाटक में होती है, जहां से देश के कुल उत्पादन का करीब 98 फीसदी हिस्सा आता है। इसके बाद तमिलनाडु, महाराष्ट्र के कोंकण के साथ ही नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में भी इसकी खेती की जाती है।
काली मिर्च का इस्तेमाल लगभग हर भारतीय रसोई में होता है। यह खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि पेड़ पर लगने वाली काली मिर्च शुरुआत में हरे रंग की होती है और सुखाने के बाद उसका रंग काला हो जाता है।
कैसी जलवायु में होती है अच्छी खेती?
काली मिर्च की खेती के लिए गर्म और नमी वाली जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है। पश्चिमी घाट के इलाके इसके लिए सबसे उपयुक्त हैं। इसकी अच्छी बढ़वार के लिए करीब 20 डिग्री सेल्सियस तापमान और 125 से 200 सेंटीमीटर सालाना बारिश आदर्श मानी जाती है। हालांकि यह 10 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान तक भी उगाई जा सकती है।
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कम लागत में कई साल तक उत्पादन
किसानों के अनुसार, काली मिर्च की खेती में बार-बार बड़ा खर्च नहीं करना पड़ता। एक बार पौधा लगाने के बाद कई वर्षों तक केवल उसकी देखभाल करनी होती है। पौधों के बीच करीब 8 फीट की दूरी रखनी चाहिए, ताकि बेलों को फैलने की पर्याप्त जगह मिल सके। एक हेक्टेयर में लगभग 1600 से 1700 पौधे लगाए जा सकते हैं। बेहतर उत्पादन के लिए प्रत्येक पौधे में 10 से 20 किलो गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट देना लाभदायक माना जाता है।
हरी मिर्च काली कैसे बनती है?
पेड़ से तोड़ने के समय काली मिर्च के दाने हरे रंग के होते हैं। तुड़ाई के बाद इन्हें कुछ समय तक पानी में रखा जाता है और फिर धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है। इसी प्रक्रिया के दौरान हरे दाने काले रंग के हो जाते हैं।
शुरुआत में दानों में करीब 70 फीसदी नमी होती है। इसलिए इन्हें अच्छी तरह सुखाना जरूरी होता है। अगर नमी रह जाए तो दाने खराब हो सकते हैं और उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। बड़े स्तर पर तुड़ाई के लिए थ्रेसिंग मशीन का भी इस्तेमाल किया जाता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही जलवायु, उचित देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान काली मिर्च की खेती से कई वर्षों तक अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
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