जोधपुर। जिन इलाकों में बारिश कम होती है और खेतों में नमी ज्यादा समय तक नहीं टिकती, वहां किसानों के लिए फसल तैयार करना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कम समय में पकने वाली फसलें किसानों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने मोठ की नई किस्म ‘काजरी मोठ-8’ (CZMO-20-8) विकसित की है। इसकी खासियत है कि यह करीब 60 से 65 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। कम बारिश वाले इलाकों में खेती करने वाले किसानों के लिए यह किस्म एक उपयोगी विकल्प बन सकती है।
60-65 दिन में फसल तैयार
काजरी मोठ-8 की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में पककर तैयार होना है। ICAR के मुताबिक, इसकी फसल करीब 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है। इससे किसानों को कम समय में फसल लेने का मौका मिल सकता है। खासकर उन इलाकों में, जहां बारिश का मौसम छोटा होता है या बीच में बारिश रुक जाने से फसलों पर असर पड़ता है।
नमी की कमी सहने की क्षमता
राजस्थान के कई इलाकों में कम बारिश और मिट्टी में नमी की कमी खेती के लिए बड़ी समस्या है। ऐसे में ऐसी किस्मों की जरूरत होती है, जो कम समय में तैयार होने के साथ नमी की कमी वाले हालात में भी उग सकें। काजरी मोठ-8 में नमी की कमी सहने की क्षमता बताई गई है। अगर फसल को अनुकूल मात्रा में नमी मिलती है, तो पौधों की बढ़वार 80 दिन या उससे ज्यादा समय तक जारी रह सकती है। हालांकि, फसल की वास्तविक अवधि और पैदावार मौसम, मिट्टी में नमी और खेती के तरीके पर निर्भर करेगी।
सूखे इलाकों के किसानों के लिए विकल्प
काजरी मोठ-8 जैसी किस्में उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हैं, जिन्हें कम बारिश और मौसम में बदलाव के बीच खेती करनी पड़ती है। कम समय में पकने की वजह से किसानों को फसल की योजना बनाने में सहूलियत मिल सकती है। मोठ-8 की खेती करने से पहले किसान काजरी या अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से बीज की उपलब्धता, अपने क्षेत्र के लिए किस्म की उपयुक्तता और बुवाई के सही समय की जानकारी जरूर लें।





