उत्तराखंड की प्रसिद्ध बद्री गाय की नस्ल को बचाने और उसकी संख्या बढ़ाने की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। ICAR के करनाल स्थित National Dairy Research Institute (NDRI) और पंतनगर स्थित G.B. Pant University of Agriculture and Technology के वैज्ञानिकों ने IVF तकनीक से एक स्वस्थ मादा बद्री बछड़ा तैयार किया है।
यह बछड़ा 11 सितंबर को एक Academic Dairy Farm में पैदा हुआ। वैज्ञानिकों ने बद्री गाय से अंडाणु लेकर लैब में बद्री नस्ल के सांड के वीर्य से उसे Fertilize किया। इसके बाद तैयार Embryo को साहीवाल गाय के गर्भ में ट्रांसफर किया गया। साहीवाल गाय ने इस प्रक्रिया में Surrogate Mother की भूमिका निभाई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले 5-7 दिनों में एक और Surrogate गाय से बद्री नस्ल का दूसरा बछड़ा पैदा होने की उम्मीद है।
दरअसल, बद्री गाय उत्तराखंड की देशी नस्ल है। यह पहाड़ी इलाकों के मौसम और परिस्थितियों के अनुकूल होती है और इसे उत्तराखंड का राजकीय पशु भी घोषित किया गया है। लेकिन देश की कई देशी पशु नस्लों की तरह बद्री गाय की संख्या भी Cross-breeding और घटते पशुधन के कारण प्रभावित हुई है।
इसी को देखते हुए वैज्ञानिक OPU-IVF यानी Ovum Pick-Up और In Vitro Fertilization तकनीक की मदद से अच्छी नस्ल की बद्री गायों की संख्या तेजी से बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इस Project की शुरुआत 2023 में हुई थी और इसे Uttarakhand Biotechnology Council से फंडिंग मिली है।
वैज्ञानिक अब ज्यादा दूध देने वाली अच्छी बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम कर रहे हैं। आगे IVF और क्लोनिंग से तैयार Embryo को अलग-अलग सरोगेट गायों में ट्रांसफर करने की योजना है।
वैज्ञानिकों ने बद्री गायों से अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडाणु निकाले। इसके बाद उन्हें Badri Bull के Semen से लैब में फर्टिलाइज किया गया और तैयार Embryo को सरोगेट गायों में ट्रांसफर किया गया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि OPU-IVF जैसी आधुनिक Reproductive Technology से अच्छी नस्ल की मादा गायों की संख्या कम समय में बढ़ाई जा सकती है। इससे बद्री जैसी देशी नस्लों को बचाने और उनके Breed Improvement में मदद मिल सकती है।





