नई दिल्ली। बदलते मौसम, कीटों और बीमारियों की वजह से सोयाबीन की खेती करना किसानों के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है। अब इन समस्याओं से निपटने और ज्यादा उपज देने वाली नई किस्में विकसित करने के लिए भारत और अमेरिका ने मिलकर एक बड़ा शोध प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, सेंसर और वायरलेस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह तीन साल का प्रोजेक्ट 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2029 तक चलेगा। इसके लिए अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) ने 5.28 लाख डॉलर (करीब 4.5 करोड़ रुपये) की फंडिंग दी है।
AI बताएगा कौन-सी किस्म सबसे बेहतर
इस परियोजना का मकसद ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे वैज्ञानिक जल्दी पता लगा सकें कि कौन-सी सोयाबीन की किस्म बीमारियों, कीटों और बदलते मौसम का बेहतर सामना कर सकती है। इससे नई और बेहतर किस्में विकसित करने का काम तेज होगा।
ड्रोन और सेंसर करेंगे खेतों की निगरानी
परियोजना के तहत खेतों में सेंसर लगाए जाएंगे, जो मिट्टी की नमी, पोषक तत्व और मौसम से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे। वहीं ड्रोन खेतों की तस्वीरें लेकर फसलों की स्थिति पर नजर रखेंगे। यह सारी जानकारी AI के जरिए विश्लेषित की जाएगी।
किसानों और वैज्ञानिकों दोनों को होगा फायदा
इस तकनीक से वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि कौन-सी किस्म किस परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन करती है। इससे नई किस्मों को विकसित करने में कम समय लगेगा और भविष्य में किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली तथा जलवायु के अनुकूल किस्में मिल सकेंगी।
भारत के कई संस्थान भी हैं शामिल
इस शोध परियोजना में आईआईटी दिल्ली, आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय समेत भारत और अमेरिका के कई संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं।
दूसरी फसलों में भी हो सकता है इस्तेमाल
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह तकनीक सफल रहती है, तो भविष्य में मक्का, दलहन और दूसरी तिलहनी फसलों की नई किस्में विकसित करने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच किसानों को बेहतर और टिकाऊ खेती का विकल्प मिल सकेगा।
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