Skip to content
News Potli
एग्री बुलेटिन

India-US ट्रेड डील: किन अमेरिकी कृषि उत्पादों को मिली भारत में entry?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत कुछ अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क घटाएगा या सीमित मात्रा में आयात की अनुमति देगा, जबकि मांस, डेयरी, अनाज और अन्य संवेदनशील फसलों में घरेलू किसानों के

NP

Pooja Rai· Correspondent

9 फ़रवरी 2026· 3 min read

India-US ट्रेड डील: किन अमेरिकी कृषि उत्पादों को मिली भारत में entry?

India-US ट्रेड डील: किन अमेरिकी कृषि उत्पादों को मिली भारत में entry?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत कुछ अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क घटाएगा या सीमित मात्रा में आयात की अनुमति देगा, जबकि मांस, डेयरी, अनाज और अन्य संवेदनशील फसलों में घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रखे गए हैं। अमेरिका भी कपड़ा, चमड़ा और अन्य भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटाने को तैयार हुआ है। सरकार का कहना है कि यह समझौता संतुलित है, लेकिन विशेषज्ञ गैर-शुल्क बाधाओं में बदलाव पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत कई अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ कृषि व खाद्य वस्तुओं पर शुल्क घटाएगा या खत्म करेगा। संयुक्त बयान के मुताबिक इसमें DDGs (पशु चारे में इस्तेमाल होने वाला प्रोटीन), लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स समेत कुछ अन्य उत्पाद शामिल हैं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने क्या कहा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि अमेरिका ने भी भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटाने पर सहमति दी है। कुछ उत्पादों पर जहां पहले 50 प्रतिशत शुल्क था, उसे शून्य किया जाएगा, जबकि झींगा (श्रिम्प) जैसे उत्पादों पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा।
गोयल ने कहा कि भारत ने मांस, पोल्ट्री, जीएम फसलें, डेयरी, चीनी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, मोटे अनाज, एथेनॉल और तंबाकू जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों में घरेलू किसानों और उद्योग की सुरक्षा की है। इन क्षेत्रों को अमेरिका के लिए नहीं खोला गया है।

इन उत्पादों को सीमित मात्रा में अनुमति
हालांकि सोयाबीन तेल, कपास, DDGs और सेब जैसे कुछ उत्पादों को सीमित मात्रा, न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) या कम शुल्क के साथ अनुमति दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका से तय मात्रा में सेब 80 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम आयात मूल्य और 25 प्रतिशत शुल्क पर आयात किए जा सकेंगे।

ये भी पढ़ें - कृषि उत्पाद समझौते से बाहर, किसानों को नहीं होगा नुकसान: कृषि मंत्री चौहान

इन उत्पादों पर शून्य शुल्क की अनुमति
मंत्री ने कहा कि भारत ने अपनी जरूरतों के हिसाब से अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए “संतुलित और सीमित” खुलापन दिया है। पिस्ता, बादाम और अखरोट जैसे मेवों पर शून्य शुल्क की अनुमति भी दी जाएगी, क्योंकि ये पहले से ही आयात हो रहे हैं।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के मुख्य अनाज, फल, मोटे अनाज और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और इन पर आयात का कोई खतरा नहीं है।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?
संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका भी भारत के कुछ उत्पादों—जैसे कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक, रसायन, हस्तशिल्प और मशीनरी—पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क लगाएगा, बशर्ते अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक पूरा हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि समझौते में भारत को कुछ कृषि और खाद्य उत्पादों पर गैर-शुल्क बाधाएं (NTBs) हटाने पर सहमति देनी पड़ सकती है, जबकि अमेरिका पर ऐसी बाध्यता नहीं है। भारत में जीएम फसलों पर रोक, क्वारंटीन नियम, लेबलिंग और खाद्य जांच जैसे कई सुरक्षा उपाय लागू हैं।

आपको बता दें कि पहले भारतीय कृषि उत्पादों पर अमेरिका में आयात शुल्क 0 से 9 प्रतिशत के बीच था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत और फिर अतिरिक्त शुल्क जोड़कर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया। अब नए समझौते के तहत कुछ उत्पादों पर शुल्क घटाने की बात कही गई है।

ये देखें -

NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min