देश में इस साल कई इलाकों में सूखे जैसे हालात और लंबे समय तक बारिश न होने से सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश और राजस्थान में अच्छी पैदावार के चलते देश में कुल उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के पहले फसल अनुमान के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026 में देश का सोयाबीन उत्पादन 107.93 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के 110.26 लाख टन उत्पादन से 2.11 फीसदी कम है।
SOPA ने यह अनुमान इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान जारी किया। एसोसिएशन के मुताबिक, महाराष्ट्र में फसल को हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई मध्य प्रदेश और राजस्थान में बेहतर उत्पादन से होने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश में 32% बढ़ सकता है उत्पादन
मध्य प्रदेश देश में सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। SOPA के अनुमान के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में यहां सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 57.16 लाख टन पहुंच सकता है, जबकि पिछले साल यह 43.24 लाख टन था। यानी इस बार उत्पादन में करीब 32.2 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान है।
राज्य में सोयाबीन की खेती का रकबा भी बढ़ा है। पिछले साल जहां 48.64 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन बोया गया था, वहीं इस साल यह बढ़कर 52.09 लाख हेक्टेयर हो गया। इसके साथ ही औसत पैदावार भी 889 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 1,108 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है।
SOPA के कार्यकारी निदेशक डी. एन. पाठक ने PTI को बताया कि इस बार मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल अच्छी रही है। राजस्थान में भी पैदावार बेहतर रही है। इन दोनों राज्यों में ज्यादा उत्पादन होने से महाराष्ट्र में हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले खरीफ सीजन के मुकाबले देश में सोयाबीन की बुवाई का रकबा करीब 5 लाख हेक्टेयर बढ़ा है।
महाराष्ट्र में 33.2% घट सकता है उत्पादन
महाराष्ट्र में इस साल सोयाबीन की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होने का अनुमान है। SOPA के मुताबिक, राज्य में उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 33.2 फीसदी घटकर 34.88 लाख टन रह सकता है। लंबे समय तक बारिश न होने और फसल की अहम बढ़वार के दौरान मिट्टी में नमी की कमी से फसल प्रभावित हुई है।
कर्नाटक और तेलंगाना में भी सूखे जैसे हालात का असर देखने को मिला है। एसोसिएशन के मुताबिक, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना में कुल 7.02 लाख हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, जिससे उसकी कटाई नहीं हो सकी।
राजस्थान में 48.2% बढ़ सकता है उत्पादन
राजस्थान में इस बार सोयाबीन की पैदावार अच्छी रहने का अनुमान है। SOPA के मुताबिक, राज्य में उत्पादन 48.2 फीसदी बढ़कर 9.47 लाख टन हो सकता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में बेहतर फसल के चलते महाराष्ट्र में उत्पादन घटने के बावजूद देश के कुल उत्पादन में गिरावट सीमित रहने की उम्मीद है।
देश में सोयाबीन की बुवाई का रकबा बढ़ा
SOPA के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026 में देशभर में 117.73 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई। यह 2025 के 112.14 लाख हेक्टेयर के मुकाबले करीब 5 फीसदी ज्यादा है।
हालांकि, सूखे जैसे हालात और मिट्टी में नमी की कमी के कारण करीब 7.76 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित हुई। इसके चलते सोयाबीन की वास्तविक कटाई वाला रकबा घटकर 109.98 लाख हेक्टेयर रह गया।
एसोसिएशन का अनुमान है कि कटाई वाले क्षेत्र में सोयाबीन की औसत पैदावार 981 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहेगी। पिछले खरीफ सीजन में औसत पैदावार 983 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। इस तरह इस साल पैदावार में मामूली कमी का अनुमान है।
सोयाबीन देश की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है। इससे खाने का तेल मिलता है और पशुपालन व पोल्ट्री उद्योग के लिए प्रोटीनयुक्त खली भी तैयार की जाती है। ऐसे में इसके उत्पादन में होने वाले बदलाव का असर खाद्य तेल की उपलब्धता और पशु आहार पर भी पड़ सकता है।





