भारतीय इलायची अब अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और खुशबू के दम पर दुनिया भर के बाजारों में अलग पहचान बना रही है। इसका असर भारत के निर्यात पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में भारत ने 436.8 मिलियन डॉलर (करीब 3,700 करोड़ रुपये) की इलायची का निर्यात किया, जो 2023-24 के 131.9 मिलियन डॉलर के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है। वहीं, निर्यात की मात्रा भी दो साल पहले के 7,083 टन से बढ़कर 16,399 टन हो गई है।
किन देशों में सबसे ज्यादा जाती है भारतीय इलायची?
भारत से सबसे ज्यादा इलायची संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब को निर्यात की जाती है। इसके अलावा बांग्लादेश, कुवैत, इराक, मलेशिया, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, मिस्र और ईरान भी भारतीय इलायची के प्रमुख खरीदार हैं।
भारत में कहां होती है इलायची की खेती?
भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार की इलायची उगाई जाती है—छोटी इलायची और बड़ी इलायची।
छोटी इलायची की खेती दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में होती है। इनमें केरल सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, जहां से देश के कुल उत्पादन का 56-58% हिस्सा आता है। केरल के इडुक्की, वायनाड और पलक्कड़ जिले इलायची उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं। वहीं, कर्नाटक के कूर्ग, हासन और चिकमंगलूर तथा तमिलनाडु के नीलगिरि, पलानी और पुलनी पहाड़ियों में भी इसकी खेती होती है।
बड़ी इलायची की खेती मुख्य रूप से सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में की जाती है। इसका इस्तेमाल मसालों के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है।
क्यों बढ़ रही है मांग?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय इलायची की बेहतरीन खुशबू, स्वाद और गुणवत्ता के कारण वैश्विक बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि पिछले दो वर्षों में भारत के इलायची निर्यात और उससे होने वाली कमाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।





