देश में मानसून की स्थिति बेहतर होने के बावजूद जुलाई में यूरिया, डीएपी, एमओपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह यह हो सकती है कि खरीफ की बुआई के चरम दौर से पहले ही किसानों ने पर्याप्त मात्रा में उर्वरक खरीदकर रख लिया था।
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में देश में यूरिया की खपत करीब 46.7 लाख टन रही। यह पिछले साल जुलाई की तुलना में 13.54 फीसदी कम है। इसी तरह डीएपी की बिक्री करीब 10 लाख टन रही, जबकि जुलाई 2025 में यह 10.8 लाख टन थी।
एमओपी की बिक्री में भी करीब 29 फीसदी की गिरावट आई और जुलाई में इसकी बिक्री लगभग 1.7 लाख टन रही। वहीं, कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री करीब 20.6 लाख टन रही, जो पिछले साल के मुकाबले 4.63 फीसदी कम है।
हालांकि, उर्वरकों की उपलब्धता मांग की तुलना में काफी ज्यादा रही। जुलाई में यूरिया की उपलब्धता करीब 117.4 लाख टन रही, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 91.6 लाख टन थी। डीएपी की उपलब्धता करीब 28.6 लाख टन रही, जो पिछले साल 24.7 लाख टन थी। इसी तरह एमओपी की उपलब्धता 10.9 लाख टन रही, जबकि जुलाई 2025 में यह 8.7 लाख टन थी।
उर्वरकों की बिक्री में कमी की एक वजह कुछ फसलों के रकबे में शुरुआती गिरावट भी बताई जा रही है। हालांकि, खरीफ फसलों की कुल बुआई अब पिछले साल के स्तर के करीब पहुंच गई है।
7 अगस्त तक देश में खरीफ फसलों की बुआई करीब 9.679 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी थी। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 1.8 फीसदी कम है।
मानसून की बात करें तो जून के अंत तक देश में बारिश सामान्य से 36.4 फीसदी कम थी, लेकिन जुलाई के अंत तक मानसून की स्थिति सुधरकर सामान्य से करीब 1 फीसदी अधिक हो गई।
अब आने वाले कुछ हफ्तों में बारिश का प्रदर्शन बेहद अहम रहेगा। अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, मिट्टी में पर्याप्त नमी रहने से रबी सीजन की शुरुआती बुआई को भी फायदा मिल सकता है।





