अदरक हमारे घर की रसोई का ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल चाय से लेकर सब्जी, अचार और कई तरह के खाद्य पदार्थों में होता है। बदलते समय के साथ अदरक की मांग सिर्फ रसोई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और दूसरे उत्पादों में भी किया जाता है। ऐसे में किसान अगर सही किस्म और खेती का तरीका अपनाएं, तो अदरक की खेती अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है।
अदरक की IISR वरदा एक ऐसी ही उन्नत किस्म है जो करीब 150 से 180 दिन में तैयार हो जाती है और बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी गुणवत्ता के लिए जानी जाती है।
IISR वरदा की खेती में कितना बीज लगेगा?
IISR वरदा की खेती के लिए करीब 1,800 से 2,000 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। इसकी बुवाई का समय मध्य अप्रैल से मई तक बताया गया है। खेती के लिए ऐसी जमीन चुननी चाहिए जहां पानी जमा न हो और जल निकासी अच्छी हो।
इस किस्म की क्या खासियत है?
IISR वरदा को उन्नत मसाला प्रभेद के तौर पर बताया गया है। इसमें उच्च गुणवत्ता, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर बाजार मूल्य जैसी खूबियां बताई गई हैं। सही समय पर बुवाई और उचित देखभाल के साथ किसान इससे बेहतर उत्पादन और आमदनी हासिल कर सकते हैं।
अदरक की खेती में किस्म का चुनाव, बीज की सही मात्रा, जल निकासी और समय पर देखभाल का खास ध्यान रखना जरूरी है।
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