राजस्थान के बीकानेर स्थित ICAR–केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH) के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एक नया जैविक कीटनाशक विकसित किया है। Thar Jaivik 41 EC नाम का यह पेटेंटेड उत्पाद न केवल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करता है, बल्कि मिट्टी, फसल और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में मदद करता है।
किन चीजों से बना है Thar Jaivik 41 EC?
यह जैविक कीटनाशक दो प्राकृतिक चीजों से तैयार किया गया है—
- तुम्बा (Citrullus colocynthis), जो रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक कड़वी वनस्पति है।
- देसी गाय का मूत्र।
इन दोनों प्राकृतिक तत्वों से तैयार इस फॉर्मूले को पेटेंट भी मिल चुका है, जिससे इसकी वैज्ञानिक मान्यता और विशिष्टता साबित होती है।
किन कीटों पर करता है असर?
यह जैविक कीटनाशक खेती में नुकसान पहुंचाने वाले कई प्रमुख कीटों को नियंत्रित करने में प्रभावी पाया गया है। इनमें शामिल हैं—
- हेलिकोवेर्पा (Helicoverpa)
- स्पोडोप्टेरा (Spodoptera)
- व्हाइटफ्लाई (Whitefly)
- एफिड्स (Aphids)
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल हानिकारक कीटों पर असर करता है, जबकि खेत में मौजूद लाभदायक कीट, परजीवी और प्राकृतिक शत्रु सुरक्षित रहते हैं।
फसल को नहीं पहुंचाता नुकसान
कई रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल से फसलों पर जलन, दाग या अन्य नुकसान हो सकता है। लेकिन Thar Jaivik 41 EC में शून्य फाइटोटॉक्सिसिटी (Zero Phytotoxicity) पाई गई है। यानी इसके इस्तेमाल से फसल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
उपभोक्ताओं के लिए भी सुरक्षित
इस जैविक कीटनाशक के छिड़काव के तीन दिन बाद फसल का सेवन सुरक्षित माना जाता है। इसमें रासायनिक अवशेष (Chemical Residue) नहीं रहते, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य उत्पाद मिलते हैं।
किसानों के लिए क्यों है खास?
- स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किया गया है।
- शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की खेती के लिए उपयुक्त है।
- रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।
- टिकाऊ (Sustainable) और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देता है।
- वैज्ञानिक तरीके से कीट प्रबंधन का बेहतर विकल्प उपलब्ध कराता है।





