चुकंदर की खेती करने वाले किसानों के लिए इसकी उन्नत किस्म Crimson Globe एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आई है। राजस्थान के जयपुर जिले में किसानों ने इस किस्म को उगाकर बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), चोमू के सहयोग से किसानों के खेतों में किए गए प्रदर्शन में इस किस्म की उपज स्थानीय किस्म के मुकाबले करीब 15 फीसदी ज्यादा दर्ज की गई। इसके अलावा, चुकंदर की जड़ों के आकार, रंग और गुणवत्ता को भी किसानों ने पसंद किया है।
क्या है Crimson Globe चुकंदर की खासियत?
Crimson Globe चुकंदर की एक उन्नत किस्म है, जिसकी जड़ें गोल या थोड़ी चपटी होती हैं। इसका रंग मध्यम लाल होता है, जबकि अंदर का गूदा गहरे लाल रंग का होता है। इसकी पत्तियां हरी होती हैं, जिनमें मैरून रंग की झलक दिखाई देती है। चुकंदर कम समय में तैयार होने वाली ठंडे मौसम की सब्जी है। इसलिए किसान इसे रबी सीजन में अपनी फसल विविधता बढ़ाने के विकल्प के रूप में देख सकते हैं।
500 वर्ग मीटर में चुकंदर उगाकर किसान ने कमाए ₹20 हजार
ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक, रबी सीजन 2024-25 में जयपुर जिले के नरसिंहपुरा, बालेखान और उदयपुरिया गांवों में चुकंदर की खेती से अच्छे नतीजे मिले। इन गांवों में उपज 240 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई। वहीं, एक किसान ने 500 वर्ग मीटर जमीन में चुकंदर उगाकर करीब 20 हजार रुपये कमाए।
इसके बाद रबी सीजन 2025-26 में जयपुर के मोरिजा गांव में Crimson Globe किस्म का प्रदर्शन किया गया। यहां किसानों ने स्थानीय किस्म के मुकाबले करीब 15 फीसदी ज्यादा उपज मिलने की जानकारी दी। किसानों को इसकी जड़ों का आकार, रंग और गुणवत्ता भी पसंद आई।
किसानों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती है यह किस्म?
Crimson Globe जैसी उन्नत किस्म किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों की खेती का विकल्प दे सकती है। कम समय में तैयार होने वाली फसल होने के कारण किसान इसे अपने खेती के कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इससे होने वाली कमाई मिट्टी, मौसम, खेती की लागत और बाजार में मिलने वाले भाव पर निर्भर करेगी।
ICAR-IARI और कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों के खेतों में किए जा रहे प्रदर्शन का मकसद ऐसी किस्मों की उपयोगिता को स्थानीय परिस्थितियों में परखना और किसानों तक खेती की बेहतर तकनीक पहुंचाना है। किसान अपने क्षेत्र में इसकी खेती शुरू करने से पहले नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से बीज की उपलब्धता और उपयुक्त खेती पद्धति की जानकारी ले सकते हैं।





