नई दिल्ली। देश में अरहर (तूर) की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अरहर की ऐसी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है, जिससे भविष्य में अधिक उपज देने वाली, जलवायु के अनुकूल, कीट व बीमारियों के प्रति अधिक सहनशील और पोषक तत्वों से भरपूर नई किस्में विकसित करना आसान होगा। ICAR ने अरहर की 'आशा' किस्म का भारत का पहला पूरी तरह एनोटेटेड टेलोमेयर-से-टेलोमेयर (T2T) संदर्भ जीनोम तैयार किया है। यह उपलब्धि भारत को दलहन अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाली मानी जा रही है।
यह जानकारी ICAR ने जारी की है। संस्था के अनुसार, इस जीनोम को वैश्विक डेटाबेस NCBI ने अरहर के वैश्विक संदर्भ जीनोम (Global Reference Genome) के रूप में भी स्वीकार किया है। यह भारत का पहला पूरी तरह एनोटेटेड T2T फसल जीनोम है।
क्या होता है पूरा जीनोम?
जीनोम किसी भी पौधे का पूरा आनुवंशिक खाका (Genetic Blueprint) होता है। इससे वैज्ञानिक यह समझ पाते हैं कि पौधे में कौन-से गुण किस जीन से जुड़े हैं। पूरा जीनोम उपलब्ध होने से नई किस्में विकसित करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक तेज और सटीक हो जाती है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
ICAR का कहना है कि इस उपलब्धि की मदद से ऐसी नई अरहर किस्में विकसित की जा सकेंगी जो अधिक उपज दें, सूखा, गर्मी और जलवायु परिवर्तन जैसी परिस्थितियों को बेहतर सहन कर सकें, कीट और बीमारियों से अधिक सुरक्षित हों और बेहतर पोषण गुणवत्ता वाली हों।
इससे किसानों की उत्पादन लागत घटाने, पैदावार बढ़ाने और दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
2011 में शुरू हुआ था यह शोध
यह उपलब्धि ICAR-राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIPB), नई दिल्ली के लंबे शोध का परिणाम है। वर्ष 2011 में इसी संस्थान ने दुनिया का पहला दलहनी फसल का ड्राफ्ट जीनोम तैयार किया था। इसके बाद 2017 में इसका उन्नत संस्करण जारी किया गया और अब वैज्ञानिकों ने अरहर का पूरा टेलोमेयर-से-टेलोमेयर (T2T) जीनोम तैयार कर लिया है।
नए जीनोम में 752.65 मिलियन बेस पेयर्स की जानकारी शामिल है और इसमें अरहर के सभी 11 गुणसूत्र (Chromosomes) का पूरा विवरण मौजूद है। वैज्ञानिकों ने इसमें 36,557 जीन और 48,008 mRNA की पहचान भी की है, जिससे इसकी सटीकता और गुणवत्ता की पुष्टि होती है।
नई तकनीकों के विकास में मिलेगी मदद
ICAR के अनुसार, यह जीनोम भविष्य में जीन की पहचान, पैन-जीनोम अध्ययन, आणविक प्रजनन (Molecular Breeding) और जीनोम एडिटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देगा। इससे बेहतर किस्मों के विकास में लगने वाला समय कम होगा और अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।
दलहन उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार ने 'दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन' (2025-26 से 2030-31) शुरू किया है। इस मिशन का लक्ष्य 2030-31 तक देश का दलहन उत्पादन लगभग 35 मिलियन टन तक पहुंचाना है। इसके तहत बेहतर बीज, अनुसंधान, नई तकनीक, किसानों को प्रशिक्षण, क्षेत्र विस्तार, सुनिश्चित खरीद और फसल के बाद की सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
ICAR का कहना है कि अरहर का यह नया जीनोम वैज्ञानिकों, पौधा प्रजनकों और किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगा। इससे नई और बेहतर किस्मों के विकास में तेजी आएगी, किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी।





