भारत दुनिया के सबसे बड़े धान उत्पादक देशों में से एक है। देश के करोड़ों किसान हर साल धान की खेती करते हैं, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि धान में कितना यूरिया और DAP डालना चाहिए? कई किसान ज्यादा उत्पादन की उम्मीद में जरूरत से अधिक यूरिया का इस्तेमाल कर देते हैं। इससे फसल को फायदा होने की बजाय नुकसान भी हो सकता है। ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।
News Potli से खास बातचीत में IFFCO उत्तर प्रदेश के स्टेट हेड यतींद्र तेवतिया ने धान की खेती में संतुलित पोषण प्रबंधन (Balanced Nutrient Management) पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि फसल की जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) का सही मात्रा में उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है, लागत कम होती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है।
इस वीडियो में जानिए:
- धान की खेती में कितना यूरिया और DAP डालना चाहिए?
- जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने से फसल पर क्या असर पड़ता है?
- नैनो DAP और नैनो यूरिया के क्या फायदे हैं?
- धान में फॉस्फोरस का सही इस्तेमाल कैसे करें?
- जिंक का प्रयोग कब और क्यों जरूरी होता है?
- बायोफर्टिलाइजर और मिट्टी के सूक्ष्मजीवों की क्या भूमिका है?
- ऑर्गेनिक कार्बन और मिट्टी की उर्वरता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
- कम लागत में धान की पैदावार बढ़ाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
वीडियो देखिए-





