हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब की फसल पर मौसम की जबरदस्त मार पड़ी है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, बर्फबारी और बदलते मौसम की वजह से सेब का उत्पादन करीब 48% घट गया है। इससे लाखों बागवानों की कमाई पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
बागवानी विभाग के मुताबिक, इस साल अब तक मंडियों में करीब 1.15 करोड़ सेब की पेटियां पहुंची हैं, जबकि पिछले साल इसी समय तक 2.18 करोड़ पेटियां पहुंच चुकी थीं। इस साल राज्य में सेब का उत्पादन पिछले 10-12 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है।
पिछले साल करीब 7 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल यह घटकर करीब 3.5 से 3.75 लाख मीट्रिक टन रह सकता है।
2.5 लाख परिवार सेब की खेती पर निर्भर
हिमाचल में सेब की खेती करीब ₹5,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। राज्य के करीब 2.5 लाख परिवार सेब की खेती से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उत्पादन में इतनी बड़ी गिरावट का असर सीधे बागवानों की कमाई और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ओलावृष्टि से भारी नुकसान
बागवानों के मुताबिक, ऊपरी शिमला समेत कई इलाकों में इस बार फसल काफी खराब रही। ओलावृष्टि से बड़ी मात्रा में सेब बर्बाद हो गए। वहीं खाद, दवाइयों, मजदूरी और पैकिंग का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
कुछ बागवानों ने बताया कि जहां पहले 1,000-1,200 पेटियां निकलती थीं, इस साल वहां सिर्फ 300-400 पेटियां ही मिल पाई हैं।
सरकारी खरीद भी हुई प्रभावित
कम उत्पादन और छोटे आकार के सेब का असर Market Intervention Scheme (MIS) के तहत होने वाली सरकारी खरीद पर भी पड़ा है। अब तक सिर्फ 10,462 मीट्रिक टन सेब खरीदा गया है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 76,674 मीट्रिक टन खरीद हो चुकी थी।
कम खरीद की वजह से HPMC को जूस और दूसरे उत्पाद बनाने के लिए कच्चे माल की कमी का सामना भी करना पड़ रहा है।
हाई डेंसिटी बागवानी पर जोर
बागवानी विभाग का कहना है कि अब सिर्फ पारंपरिक तरीके से सेब की खेती करना काफी नहीं होगा। पुराने बागों में उत्पादन लगातार घट रहा है, इसलिए किसानों को High-Density Plantation और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी जा रही है।
विभाग करीब 1 से 1.5 लाख हाई-डेंसिटी पौधे तैयार कर रहा है, जिन्हें अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों के हिसाब से लगाया जाएगा।
मौसम से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए विभाग ने बागवानों से Weather-Based Crop Insurance Scheme में ज्यादा से ज्यादा जुड़ने की अपील की है। वहीं राज्य सरकार MIS के तहत सेब की खरीद कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसका प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा।
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