गेहूं की ऐसी किस्म, जिससे अच्छी पैदावार के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी मिल सके। इसी को ध्यान में रखते हुए गेहूं की किस्म HI 8849 (पूसा बायोफोर्टिफाइड व्हीट श्री मंगल) विकसित की गई है। यह गेहूं की एक खास किस्म है, जिसमें जिंक की मात्रा भी अच्छी है। ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के इंदौर स्थित क्षेत्रीय केंद्र के मुताबिक, इस किस्म से औसतन 51.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिल सकती है। इसे प्रायद्वीपीय क्षेत्र में समय पर सिंचाई की सुविधा वाले इलाकों में खेती के लिए तैयार किया गया है।
इस किस्म की खासियत क्या है?
HI 8849 गेहूं की ड्यूरम किस्म है। इसकी प्रमुख खासियत इसकी अच्छी पैदावार और जिंक की मात्रा है। इसके गेहूं में 41.1 पीपीएम जिंक पाया जाता है। जिंक शरीर की सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। बायोफोर्टिफाइड फसलों का उद्देश्य फसल में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाना है, ताकि लोगों को भोजन से बेहतर पोषण मिल सके।
हालांकि, इसकी औसत उपज और जिंक की मात्रा किसानों के लिए उपयोगी जानकारी है, लेकिन खेती करने से पहले अपने इलाके की जलवायु, मिट्टी और सिंचाई की स्थिति के हिसाब से इसकी उपयुक्तता की जानकारी जरूर लें।





