भारत में गेहूं की खेती मुख्य रूप से रबी सीजन में होती है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और बिहार का स्थान आता है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में उत्तर प्रदेश में करीब 3.56 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ। वहीं मध्य प्रदेश में 2.45 करोड़ टन और पंजाब में करीब 1.80 करोड़ टन गेहूं पैदा हुआ।
गेहूं की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होकर नवंबर तक चलती है। सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए नवंबर का पहला पखवाड़ा अच्छा माना जाता है। हालांकि, बुवाई का सही समय इलाके और किस्म के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।
मध्य क्षेत्र के लिए विकसित की गई है HD 3463
ICAR-IARI की ओर से विकसित HD 3463 ब्रेड गेहूं की किस्म है। इसे मध्य क्षेत्र के लिए विकसित किया गया है। अक्टूबर 2026 की सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, इस किस्म की खेती मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश के झांसी मंडल और राजस्थान के कोटा व उदयपुर मंडल के लिए मंजूर की गई है।
इस किस्म की खास बात इसमें मौजूद पोषक तत्व हैं। ICAR के मुताबिक, इसमें 12.1 फीसदी प्रोटीन और 40.1 ppm आयरन पाया जाता है। इसलिए इसे पोषण के लिहाज से बेहतर गेहूं की किस्म के रूप में पेश किया गया है।
सिंचित और अगेती बुवाई के लिए उपयुक्त
HD 3463 को सिंचित परिस्थितियों में अगेती बुवाई के लिए उपयुक्त बताया गया है। हालांकि, किसान इसकी खेती करने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से इसकी बुवाई का सही समय और बीज की उपलब्धता जरूर पता कर लें।
गेहूं का इस्तेमाल
गेहूं का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आटा बनाकर रोटी और दूसरी खाद्य चीजें तैयार करने में होता है। इसके अलावा इससे मैदा, सूजी और दलिया भी बनाया जाता है। मैदे का इस्तेमाल ब्रेड, बिस्कुट, केक, नूडल्स और पास्ता जैसे उत्पाद बनाने में होता है। गेहूं के चोकर का इस्तेमाल पशु आहार में भी किया जाता है। इस तरह गेहूं हमारी रोजमर्रा की खाद्य जरूरतों के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी अहम फसल है।
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