गन्ना किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम कैसे मिले और चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाई जाए या नहीं, इस पर सरकार ने एक कमेटी बनाई है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में बनी यह 5 सदस्यीय कमेटी गन्ना किसानों की मांगों और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर विचार करेगी।
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है।
कमेटी किसानों की खेती और दूसरी लागतों को ध्यान में रखते हुए गन्ने का उचित दाम दिलाने के उपाय सुझाएगी। साथ ही, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाने की मांग पर भी विचार करेगी। चीनी की यह कीमत आखिरी बार जून 2018 में 29 रुपये प्रति किलो तय की गई थी। इसके बाद 2018-19 में इसे बढ़ाकर 31 रुपये प्रति किलो किया गया, लेकिन तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
कमेटी गन्ने की तौल में पारदर्शिता, वजन मापने वाली मशीनों की जांच और मशीन से गन्ने की कटाई के दौरान वजन में होने वाली कमी जैसे मुद्दों की भी समीक्षा करेगी। इसके अलावा, वह यह देखेगी कि इन वजहों से किसानों को मिलने वाले भुगतान पर क्या असर पड़ता है।
कमेटी किसानों, चीनी मिलों, राज्य सरकारों, संबंधित मंत्रालयों, शोध संस्थानों और विशेषज्ञों से चर्चा करेगी। हालांकि, सरकार ने रिपोर्ट सौंपने के लिए कोई तय समयसीमा नहीं बताई है। कमेटी को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट और सुझाव देने को कहा गया है।





