“'परंपरागत तरीके से उगाए गए लहसुन का दाम 15,000-16,000 रुपये प्रति क्विंटल मिला, जबकि मल्चिंग विधि से उगाए गए लहसुन का दाम 25,000-27,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिला।' ये कहना है मध्य प्रदेश के रतलाम के किसान जगदीश पाटीदार का।
अगर आप बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं और चाहते हैं कि उत्पादन के साथ-साथ फसल की क्वालिटी भी अच्छी रहे, तो मल्चिंग तकनीक आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। मध्य प्रदेश के रतलाम के किसान जगदीश पाटीदार बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती करते हैं। उनका कहना है कि मल्चिंग विधि से उगाए गए लहसुन की क्वालिटी बेहतर रही, जिसकी वजह से मंडी में उन्हें अच्छा भाव मिला।
जगदीश पाटीदार के मुताबिक, परंपरागत तरीके से उगाए गए लहसुन का भाव करीब 15,000-16,000 रुपये प्रति क्विंटल मिला, जबकि मल्चिंग विधि से उगाए गए लहसुन का भाव 25,000-27,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। उनका दावा है कि इस तकनीक से सामान्य खेती के मुकाबले 20-30 फीसदी तक ज्यादा उत्पादन भी मिल सकता है।
क्या है मल्चिंग तकनीक?
मल्चिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें प्लास्टिक शीट या जैविक पदार्थ से मिट्टी को ढक दिया जाता है। इससे खेत में खरपतवार कम उगती है, मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पौधों को मिट्टी से पोषण मिलने में मदद मिलती है।
“जगदीश के मुताबिक, मल्चिंग से सिर्फ उत्पादन ही नहीं बढ़ता, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। मिट्टी में नमी और पोषण बना रहने से पौधों की अच्छी ग्रोथ होती है और लहसुन की क्वालिटी बेहतर मिल सकती है।
लहसुन की बुवाई का समय नजदीक
आमतौर पर लहसुन की बुवाई सितंबर-अक्टूबर के आसपास की जाती है। ऐसे में अगर आप इस सीजन लहसुन की खेती करने की सोच रहे हैं, तो अभी से खेत की तैयारी, बीज और खेती की तकनीक को लेकर योजना बना सकते हैं।
हालांकि, मल्चिंग से मिलने वाला उत्पादन और भाव मिट्टी, मौसम, बीज, प्रबंधन और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए किसान अपने इलाके की परिस्थितियों के हिसाब से कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर इस तकनीक को अपनाएं।
देखिए वीडियो -





