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FSSAI की "फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स" लैब इस तरह करती है दूध में मिलावट की जांच

FSSAI की मोबाइल खाद्य जाँच प्रयोगशाला, जिसे "फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स" (FSW) के रूप में भी जाना जाता है, विशेष रूप से गांवों, कस्बों और दूरदराज के इलाकों में खाद्य जाँच, ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रमों

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Pooja Rai·Correspondent·26 Mar 2025· 3 min read

FSSAI की "फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स" लैब इस तरह करती है दूध में मिलावट की जांच

FSSAI की "फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स" लैब इस तरह करती है दूध में मिलावट की जांच

FSSAI की मोबाइल खाद्य जाँच लैब, जिसे "फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स" (FSW) के रूप में भी जाना जाता है, विशेष रूप से गांवों, कस्बों और दूरदराज के इलाकों में खाद्य जाँच, ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान में, 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 285 FSW यूनिट काम कर रही हैं। ये यूनिट्स सभी बुनियादी ढांचे, जिसमें "मिल्क-ओ-स्क्रीन" उपकरण शामिल हैं, जो मुख्य गुणवत्ता मापदंडों जैसे वसा, एसएनएफ, प्रोटीन और मिलावटी पानी, यूरिया, सुक्रोज, माल्टोडेक्सट्रिन और अमोनियम सल्फेट की मौके पर जांच के लिए हैं। इसके अलावा FSW अन्य खाद्य उत्पादों के लिए भी बुनियादी मिलावट जाँच करने में सक्षम हैं।

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने 25 मार्च, 2025 को लोकसभा में बताया कि FSSAI फूड आइटम्स के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित करता है और कंज्यूमर्स के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनके निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को नियंत्रित करता है।

ये भी पढ़ें - FSSAI ने बताई असली-नकली मिर्च की पहचान

मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 में, FSSAI ने "राष्ट्रीय वार्षिक निगरानी योजना" प्रस्तुत की। इसके अतिरिक्त, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी स्थानीय आवश्यकताओं, खाद्य प्रवृत्तियों, उपभोग पैटर्न और मिलावट जैसे मुद्दों के अनुरूप स्वतंत्र निगरानी और प्रवर्तन उपाय करते हैं। FSSAI समय-समय पर अखिल भारतीय निगरानी भी करता है, यह मुख्य खाद्य पदार्थों और मिलावट की दृष्टि से संवेदनशील अन्य वस्तुओं पर केंद्रित होता है।

फूड प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी तय
लोकसभा में जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के नियमों के तहत खाद्य व्यवसाय संचालक (FBO) के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। खासतौर से वो संचालक जो कच्चे माल की खरीद से लेकर उपभोक्ताओं तक तैयार माल की डिलीवरी करते हैं। ऐसे संचालकों को फूड प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी तय करनी होगी। फूड से जुड़ी पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए संचालकों को आपूर्ति श्रृंखला में उचित रिकॉर्ड और दस्तावेज रखने होंगे। निरीक्षण और ऑडिट के दौरान जरूरत पड़ने पर ये दस्तावेज पेश करने होंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो उल्लंघन के मामले में उचित नियामक कार्रवाई की जा सकती है।

डेयरी क्षेत्र में ऐसे काम करती है FSSAI
लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011 के अंतर्गत दूध और दूध से बने प्रोडक्ट के लिए मानक स्थापित किए हैं। मानकों का अनुपालन तय कराने के लिए पूरे देश में डेयरी सहकारी समितियों समेत सभी खाद्य व्यवसाय संचालन (FBO) पर समान रूप से लागू होते हैं। नए मानक विकसित करते समय या मौजूदा मानकों में संशोधन करते समय, FSSAI आम जनता और हितधारकों से प्रतिक्रिया और सुझाव मांगने के लिए मसौदा अधिसूचनाएं जारी करता है। डेयरी सहकारी समितियों से इनपुट सहित प्राप्त फीडबैक की मानक-निर्धारण प्रक्रिया के दौरान गहन समीक्षा और विचार किया जाता है।

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