देश के कई हिस्सों में बारिश के बीच नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की 18 अगस्त को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आयोग ने इन जगहों की स्थिति को ‘सीवियर फ्लड सिचुएशन’ यानी गंभीर बाढ़ की स्थिति में रखा है। कुछ नदियों का पानी अभी बढ़ रहा है, जबकि कुछ जगह जलस्तर स्थिर या कम हो रहा है।
यूपी में घाघरा, टोंस और सोन नदी की स्थिति गंभीर
उत्तर प्रदेश में कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर 106.57 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 106.07 मीटर से 0.50 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर फिलहाल स्थिर है। घाघरा नदी अयोध्या में भी खतरे के निशान से ऊपर है। यहां पानी 92.90 मीटर पर है, जो खतरे के निशान से 0.17 मीटर ऊपर है।
प्रयागराज के चकघाट में टोंस नदी का जलस्तर 92.70 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 92.20 मीटर से 0.50 मीटर ऊपर है। खास बात यह है कि यहां नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।
वहीं सोनभद्र के निवारी में सोन नदी 180.50 मीटर पर बह रही है। यह खतरे के निशान 180 मीटर से 0.50 मीटर ऊपर है और पानी बढ़ने का सिलसिला जारी है। सोनभद्र के ही निगाई में सोन नदी का जलस्तर 160 मीटर है, जो खतरे के निशान के बराबर है।
बिहार में गंडक, कोसी और बागमती भी खतरे के ऊपर
बिहार में भी कई प्रमुख नदियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक नदी 63.05 मीटर पर बह रही है। यह खतरे के निशान 62.22 मीटर से 0.83 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर फिलहाल स्थिर है।
खगड़िया के बलतारा में कोसी नदी का जलस्तर 34.52 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 33.85 मीटर से 0.67 मीटर ऊपर है। यहां पानी बढ़ रहा है।
इसी तरह मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में बागमती नदी 49.04 मीटर पर है। यह खतरे के निशान 48.68 मीटर से 0.36 मीटर ऊपर है और जलस्तर बढ़ रहा है। ऐसे में नदी के आसपास और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
असम में धनसिरी नदी भी गंभीर स्थिति में
असम के गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में धनसिरी (दक्षिण) नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सुबह 6 बजे नदी का जलस्तर 78.53 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 78.42 मीटर से 0.11 मीटर ऊपर है। यहां पानी करीब 30 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
मध्य प्रदेश में बेलन और टोंस नदी खतरे के ऊपर
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में भी दो नदियां गंभीर स्थिति में हैं। कैरी में बेलन नदी का जलस्तर 94.12 मीटर है, जो खतरे के निशान 93.35 मीटर से 0.77 मीटर ऊपर है। यहां पानी स्थिर है।
वहीं रीवा में टोंस नदी 263.23 मीटर पर बह रही है। यह खतरे के निशान 263 मीटर से 0.23 मीटर ऊपर है। हालांकि यहां जलस्तर करीब 10 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कम हो रहा है।
ओडिशा में बैतरणी नदी का जलस्तर खतरे के ऊपर
ओडिशा में बैतरणी नदी भी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। केंदुझर जिले के आनंदपुर में नदी का जलस्तर 38.38 मीटर है, जो खतरे के निशान 38.36 मीटर से 0.02 मीटर ऊपर है। हालांकि यहां पानी तेजी से कम हो रहा है।
वहीं भद्रक जिले के अखुआपाड़ा में बैतरणी नदी 19.43 मीटर पर है, जो खतरे के निशान 18.33 मीटर से 1.10 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर स्थिर है।
बालेश्वर जिले के मथानी रोड ब्रिज पर जालका नदी भी खतरे के निशान से ऊपर है। यहां नदी 6.92 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान 6.50 मीटर से 0.42 मीटर ऊपर है।
झारखंड में सोन नदी भी खतरे के निशान से ऊपर
झारखंड के पलामू जिले के जपला में सोन नदी का जलस्तर 125.28 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 125.09 मीटर से 0.19 मीटर ऊपर है। यहां पानी फिलहाल स्थिर बना हुआ है।
नदियों की स्थिति पर लगातार नजर
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में जिन नदियों को गंभीर स्थिति में बताया गया है, उनमें कई जगह पानी अभी बढ़ रहा है। खासकर असम की धनसिरी, बिहार की कोसी और बागमती तथा उत्तर प्रदेश की टोंस और सोन नदी में बढ़ता जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है।
नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने का मतलब है कि आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। संबंधित विभाग नदियों के जलस्तर और उसके रुझान पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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