नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत में खाद की सप्लाई पर संकट का खतरा पैदा हो गया था। हालांकि, देश में यूरिया, DAP और दूसरी कॉम्प्लेक्स खाद की उपलब्धता को फिलहाल संभाल लिया गया है, लेकिन इस संकट ने भविष्य में खाद की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसे देखते हुए संसद की रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थायी समिति ने सरकार को खाद की सप्लाई के लिए पहले से एक मजबूत और स्थायी व्यवस्था बनाने की सलाह दी है।
संकट के समय खाद की सप्लाई के लिए बने स्थायी प्लान
समिति ने कहा कि युद्ध, समुद्री रास्ते बंद होने या किसी दूसरे अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण अगर खाद का आयात प्रभावित होता है, तो देश में इसकी कमी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सरकार को एक स्थायी आपात योजना तैयार करनी चाहिए।
इस योजना में वैकल्पिक देशों से खाद खरीदने की व्यवस्था, पर्याप्त बफर स्टॉक, परिवहन की पहले से तैयारी और संकट के समय गैस की उपलब्धता की नियमित समीक्षा शामिल होनी चाहिए।
भारत यूरिया और LNG की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में रुकावट आने पर खाद उत्पादन और आयात दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
खाद की निगरानी के लिए बने स्थायी सेल
संसदीय समिति ने खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखने के लिए एक स्थायी संयुक्त उर्वरक कमांड एवं मॉनिटरिंग सेल बनाने का सुझाव दिया है।
यह सेल हर फसल सीजन में खाद की मांग, उपलब्ध स्टॉक, राज्यों तक सप्लाई और वितरण की निगरानी कर सकता है। अगर किसी राज्य या इलाके में खाद की कमी होने लगे तो समय रहते वहां खाद पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकेगी।
समिति के मुताबिक, कई बार देश में खाद पर्याप्त होने के बावजूद राज्य स्तर पर समन्वय और आखिरी छोर तक खाद पहुंचाने में दिक्कत के कारण किसानों को परेशानी होती है।
खाद के साथ दूसरे उत्पाद जबरन बेचने पर सख्ती
समिति ने सब्सिडी वाली खाद के साथ नैनो यूरिया जैसी गैर-सब्सिडी वाली चीजें जबरन खरीदवाने के मामलों पर भी चिंता जताई है।
समिति का कहना है कि लगातार सलाह देने के बावजूद अगर ऐसी बिक्री नहीं रुक रही है तो अब सख्त नियम जरूरी हैं। इसके लिए गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों की अलग डिजिटल बिलिंग, ई-PoS और iFMS सिस्टम में ऐसी बिक्री की पहचान और शिकायतों का केंद्रीय रिकॉर्ड रखने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा Fertilizer Control Order, 1985 में बदलाव कर खाद के साथ दूसरे उत्पादों की जबरन बिक्री पर रोक और दंड का प्रावधान करने की बात कही गई है।
खाद की ढुलाई का खर्च भी कम करने पर जोर
समिति ने खाद को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने में होने वाले खर्च को कम करने की भी सिफारिश की है।
सरकार को समय-समय पर यह देखना चाहिए कि खाद को कहां से मंगाना और किस राज्य तक पहुंचाना सबसे किफायती रहेगा। खाद के आवंटन में दूरी और नजदीकी को ध्यान में रखने से परिवहन खर्च और सरकार पर पड़ने वाला फ्रेट सब्सिडी का बोझ कम किया जा सकता है।
खाद सब्सिडी की व्यवस्था की समीक्षा की मांग
समिति ने खाद पर मिलने वाली DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा करने को कहा है।
इसके लिए AgriStack और Soil Health Card जैसे डिजिटल रिकॉर्ड को खाद सब्सिडी व्यवस्था से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इससे किसान की जमीन, फसल और पोषक तत्वों की जरूरत के हिसाब से खाद की व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
समिति के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में खाद कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान होता है, लेकिन यह किसान की जमीन, फसल और वास्तविक पोषक तत्वों की जरूरत से पूरी तरह जुड़ी नहीं है। इसलिए व्यवस्था को ज्यादा लक्षित और तकनीक आधारित बनाने की जरूरत है।





