यूरिया, DAP और दूसरी महंगी खाद डालने और समय-समय पर सिंचाई करने के साथ यह भी जरूरी है कि किसान अपने खेत में समय-समय पर गोबर की खाद डालते रहें। अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने में मदद करती है, जिससे मिट्टी की सेहत बेहतर होती है और फसल की अच्छी पैदावार में मदद मिलती है। ICAR के मुताबिक, गोबर की खाद मिट्टी की संरचना सुधारने, पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने और मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता को बेहतर करने में भी मदद करती है।
मिट्टी में बढ़ती है नमी और पोषक तत्वों की उपलब्धता
ICAR के अनुसार, गोबर की खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाती है, जिससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और वह भुरभुरी बनती है। इससे फसल की जड़ों को फैलने में मदद मिलती है। साथ ही मिट्टी में पानी रोककर रखने की क्षमता भी बढ़ती है, जिससे नमी ज्यादा समय तक बनी रह सकती है।
गोबर की खाद से मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा, मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ती है, जो पोषक तत्वों के चक्रण में अहम भूमिका निभाते हैं।
ताजा गोबर के बजाय अच्छी तरह सड़ी खाद डालें
किसानों को खेत में ताजा गोबर डालने के बजाय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। ICAR की सलाह के मुताबिक, गोबर की खाद को बुवाई से पहले खेत में डालना बेहतर रहता है और एक सलाह में इसे कम से कम 3 सप्ताह पहले डालने की बात कही गई है।
हालांकि, सिर्फ गोबर की खाद पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। मिट्टी की जांच के आधार पर गोबर की खाद के साथ रासायनिक खाद, जैव उर्वरक और दूसरी जरूरी पोषक सामग्री का संतुलित इस्तेमाल करने से मिट्टी की सेहत बनाए रखने और फसल की अच्छी बढ़वार में मदद मिल सकती है।





