भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से किसानों के लिए मक्का और गन्ने का एक नया बाजार जरूर तैयार हुआ है, लेकिन अगर E20 से आगे एथेनॉल का मिश्रण बढ़ाया जाता है तो खाद्य सुरक्षा, खेती की जमीन, पानी और खाद्य तेल के आयात पर असर पड़ सकता है। द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन और आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पूजारी के लेख में इसको लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है।
E20 से आगे बढ़ने पर बढ़ेगी फसलों की मांग
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने यानी E20 का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया है। सरकार इसे कच्चे तेल के आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करने की नीति के तौर पर देखती है।
हालांकि, अगर भविष्य में E27 या E30 जैसे ज्यादा एथेनॉल मिश्रण की ओर बढ़ा जाता है तो इसके लिए मक्का, गन्ना और दूसरी कृषि फसलों की मांग भी बढ़ेगी। CEA के लेख के मुताबिक, ऐसे में यह देखना जरूरी होगा कि ईंधन के लिए फसलों की बढ़ती मांग का खाद्य उत्पादन पर कितना असर पड़ता है।
मक्का की बढ़ती मांग किसानों के लिए अवसर भी, चुनौती भी
एथेनॉल बनाने में मक्के का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेख के मुताबिक, भारत में बनने वाले एथेनॉल का करीब आधा हिस्सा अब मक्के से आता है, जबकि अनाज से बनने वाले एथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 67 प्रतिशत है।
मक्का किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार और आय का जरिया बन सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल केवल एथेनॉल के लिए नहीं होता। पोल्ट्री और पशुपालन उद्योग में भी मक्के की बड़ी मांग है। इसलिए डिस्टिलरी की मांग बढ़ने पर मक्के की कीमत और उपलब्धता दोनों पर असर पड़ सकता है।
अगर किसान दूसरी फसलों की जगह मक्का की खेती बढ़ाते हैं तो सोयाबीन, मूंगफली और सरसों जैसी तिलहन फसलों का रकबा प्रभावित हो सकता है। इससे आगे चलकर देश के खाद्य तेल उत्पादन और आयात पर भी असर पड़ने की आशंका है।
गन्ने की खेती बढ़ी तो पानी पर दबाव
एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना भी प्रमुख फसल है। लेकिन गन्ने की खेती में पानी की खपत काफी अधिक होती है। लेख में कहा गया है कि एथेनॉल नीति बनाते समय केवल डिस्टिलरी में इस्तेमाल होने वाले पानी का हिसाब करना पर्याप्त नहीं है।
गन्ना और एथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली दूसरी फसलों को उगाने में कितना पानी खर्च होता है, इसे भी गणना में शामिल करना चाहिए। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में पानी के संसाधनों पर पहले से दबाव है। ऐसे में एथेनॉल के लिए गन्ने की मांग बढ़ने से जल संकट और गहरा सकता है।
एथेनॉल बनाम खाद्य सुरक्षा का सवाल
CEA और आकाश पूजारी के लेख में सबसे अहम सवाल 'खाद्य बनाम ईंधन' का उठाया गया है। खेती की जमीन सीमित है और उसी जमीन पर खाद्यान्न, तिलहन, पशु चारा और एथेनॉल के लिए जरूरी फसलें उगाई जाती हैं।
अगर एथेनॉल के लिए मक्का और गन्ने जैसी फसलों को लगातार ज्यादा प्रोत्साहन मिलता है तो किसानों का फसल चयन बदल सकता है। इसका असर देश के खाद्य उत्पादन और कृषि संतुलन पर लंबे समय में दिखाई दे सकता है।
खाद्य तेल के आयात पर भी नजर जरूरी
भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में अगर मक्के की बढ़ती मांग के कारण किसान तिलहन फसलों से हटकर मक्का की ओर जाते हैं, तो घरेलू तिलहन उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
इस स्थिति में एक तरफ सरकार कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रण बढ़ाएगी, लेकिन दूसरी तरफ खाद्य तेल का आयात बढ़ सकता है। इसलिए एथेनॉल नीति का आकलन केवल पेट्रोल आयात में बचत के आधार पर नहीं, बल्कि दोनों तरह के आयात और कृषि जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
एथेनॉल नीति से किसानों को मिले फायदे
CEA और आकाश पूजारी ने एथेनॉल नीति के फायदे भी स्वीकार किए हैं। एथेनॉल ने गन्ना किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार किया है और चीनी उद्योग को भी सहारा मिला है। इससे चीनी के अतिरिक्त उत्पादन को एथेनॉल में बदलने का रास्ता मिला और किसानों के भुगतान में भी मदद हुई।
हालांकि, आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले यह देखना जरूरी है कि इसके लिए कितनी कृषि भूमि और पानी की जरूरत होगी और इसका दूसरी फसलों पर क्या असर पड़ेगा।
E20 के बाद E30 पर फैसला जल्दबाजी में न हो
लेख में सुझाव दिया गया है कि E20 से आगे E27 या E30 की ओर बढ़ने से पहले विस्तृत लागत-लाभ आकलन किया जाना चाहिए। इसमें खाद्य सुरक्षा, पानी, जमीन, किसानों की आय, फसल पैटर्न और खाद्य तेल के आयात जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए।
CEA ने पुराने दोपहिया वाहनों के लिए E10 पेट्रोल को E20 के साथ फिर से उपलब्ध कराने की बात भी कही है। देश में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन हैं, जिनमें कई कार्ब्यूरेटर आधारित हैं। ऐसे वाहनों के लिए E10 एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
ये भी देखें-





