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20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से खाद्य सुरक्षा पर असर नहीं, सरकार ने संसद में किया स्पष्ट

सरकार ने संसद में बताया कि 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य के लिए केवल FCI के अतिरिक्त चावल और मक्के का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के अनुसार इससे देश की खाद्य सुरक्षा, राशन व्यवस्था और खाद्यान्न की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ा है।

Pooja Rai

Pooja Rai·22 Jul 2026

सरकार का कहना है कि एथेनॉल बनाने के लिए केवल वही अनाज इस्तेमाल किया जा रहा है, जो देश की जरूरत पूरी होने के बाद बच जाता है।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल बनाने के लिए केवल वही अनाज इस्तेमाल किया जा रहा है, जो देश की जरूरत पूरी होने के बाद बच जाता है।

देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (एथेनॉल ब्लेंडिंग) के लक्ष्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने संसद में साफ किया है कि इससे देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल बनाने के लिए केवल वही अनाज इस्तेमाल किया जा रहा है, जो देश की जरूरत पूरी होने के बाद बच जाता है।

राज्यसभा में एक लिखित जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि वर्तमान एथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY 2025-26) में जून 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के लगभग 39 लाख टन अतिरिक्त चावल और 68 लाख टन मक्का का उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया है।

पहले खाद्य सुरक्षा, फिर एथेनॉल

सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज तभी दिया जाता है, जब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), अन्य कल्याणकारी योजनाओं और बफर स्टॉक की जरूरत पूरी हो जाती है। यानी लोगों के लिए जरूरी खाद्यान्न उपलब्ध कराने के बाद ही बचा हुआ अनाज एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।

बेकार होने वाले अनाज का भी हो रहा उपयोग

सरकार के मुताबिक, यह योजना 'वेस्ट टू वेल्थ' की सोच पर आधारित है। इसके तहत अतिरिक्त चावल, टूटा हुआ चावल, खराब या मानव उपभोग के लायक नहीं बचे खाद्यान्न और अन्य स्वीकृत कृषि उत्पादों का उपयोग एथेनॉल बनाने में किया जाता है। इससे अनाज खराब होने से बचता है और उसका बेहतर इस्तेमाल हो पाता है।

चीनी की उपलब्धता भी प्रभावित नहीं

सरकार ने बताया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त चीनी का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए देश में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। पिछले चीनी सीजन की तुलना में चीनी की खुदरा कीमतों में केवल लगभग 2.5% की बढ़ोतरी हुई है।

एथेनॉल की खरीद लगातार बढ़ रही

सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने एथेनॉल की खरीद में भी लगातार बढ़ोतरी की है। ESY 2024-25 में कंपनियों ने 1,033.31 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदा, जबकि ESY 2025-26 में जून 2026 तक 705.43 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद की जा चुकी है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल पंपों पर बिना एथेनॉल वाला या कम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अलग से उपलब्ध कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का लक्ष्य जैव ईंधन नीति के तहत स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

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