भारत में खाने के तेल का आयात लगातार महंगा होता जा रहा है। देश की जरूरत का बड़ा हिस्सा आज भी विदेशों से आयात किया जाता है। ऐसे में रुपये की कमजोरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें और देश में तिलहन का कम उत्पादन मिलकर आयात बिल को लगातार बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को इस बढ़ते खर्च से बचना है, तो किसानों को तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करना होगा।
आठ महीने में आयात बिल 20% बढ़ा
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, नवंबर से जून के बीच भारत ने 104 लाख टन से अधिक खाद्य तेल आयात किया। इस दौरान आयात बिल 99 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.19 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी सिर्फ आठ महीनों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
उद्योग का अनुमान है कि 2025-26 ऑयल ईयर के अंत तक देश का खाद्य तेल आयात बिल 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले साल यह 1.61 लाख करोड़ रुपये था।
रुपये की कमजोरी और मौसम ने बढ़ाई मुश्किल
SEA के अध्यक्ष संजीव अस्थाना के मुताबिक, आयात बिल बढ़ने की वजह सिर्फ ज्यादा आयात नहीं है। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से विदेशों से तेल खरीदना महंगा हो गया है। वहीं, देश में अनियमित मानसून और मौसम की मार के कारण तिलहन फसलों का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। इससे भारत को अधिक मात्रा में और ज्यादा कीमत देकर खाद्य तेल खरीदना पड़ रहा है।
वैश्विक बाजार का भी पड़ रहा असर
दुनिया के सबसे बड़े पाम ऑयल उत्पादकों में शामिल इंडोनेशिया ने अपने बायोडीजल कार्यक्रम का विस्तार किया है। इससे पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा ईंधन बनाने में इस्तेमाल हो रहा है और खाद्य तेल की वैश्विक आपूर्ति कम हुई है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय तनाव, माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ने से भी खाद्य तेल महंगा हो गया है।
तिलहन की बुवाई में आई गिरावट
इस साल खरीफ सीजन में तिलहन फसलों की बुवाई भी कम हुई है। जुलाई के मध्य तक देश में 147 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 155.7 लाख हेक्टेयर थी। यानी करीब 8.6 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हुई है।
मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई भी पिछड़ गई है। यदि अगस्त और सितंबर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो उत्पादन और प्रभावित हो सकता है।
किसानों के लिए तिलहन खेती बड़ा अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की खाद्य तेल पर आयात निर्भरता कम करने का सबसे अच्छा तरीका देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाना है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष एस. महेंद्र देव ने भी किसानों को तिलहन और दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही है।
SEA का कहना है कि यदि किसानों को अच्छा बाजार भाव, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक तकनीक, सरकारी खरीद की गारंटी और बेहतर कृषि सलाह मिले, तो वे बड़े पैमाने पर तिलहन की खेती अपनाने के लिए तैयार होंगे। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और देश का आयात बिल भी कम होगा।
देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य तेलों का बढ़ता आयात बिल केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है। इसका असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार, कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसलिए अगर भारत तिलहन उत्पादन बढ़ाने में सफल होता है, तो इससे किसानों को बेहतर कमाई का मौका मिलेगा और देश की विदेशों पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम हो सकेगी। आने वाले समय में अच्छी बारिश और सरकार की सही नीतियां इस दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी।





