News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. Economic Survey 2025-26: खाद नीति में बदलाव की जरूरत, यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल पर ब्रेक
एग्री बुलेटिन

Economic Survey 2025-26: खाद नीति में बदलाव की जरूरत, यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल पर ब्रेक

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में यूरिया की कीमत में हल्की बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है, लेकिन इसके बदले किसानों को प्रति एकड़ सीधी नकद सहायता देने की बात कही गई है। सर्वे के मुताबिक सस्ती यूरिया के कारण क

Pooja Rai

Pooja Rai·29 Jan 2026· 4 min read

Economic Survey 2025-26: खाद नीति में बदलाव की जरूरत, यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल पर ब्रेक

Economic Survey 2025-26: खाद नीति में बदलाव की जरूरत, यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल पर ब्रेक

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में यूरिया की कीमत में हल्की बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है, लेकिन इसके बदले किसानों को प्रति एकड़ सीधी नकद सहायता देने की बात कही गई है। सर्वे के मुताबिक सस्ती यूरिया के कारण किसान जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है और पैदावार पर असर पड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य खाद के असंतुलित उपयोग को ठीक करना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना और खेती को लंबे समय में ज्यादा टिकाऊ बनाना है।

नई दिल्ली: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सरकार ने यूरिया की कीमत को लेकर बड़ा सुझाव दिया है। सर्वे में कहा गया है कि यूरिया के खुदरा दाम में हल्की बढ़ोतरी की जानी चाहिए। अभी यूरिया का दाम मार्च 2018 से 45 किलो की बोरी पर 242 रुपये पर ही स्थिर है।साथ ही, कीमत बढ़ने से किसानों पर पड़ने वाला बोझ सीधे उनके खाते में प्रति एकड़ नकद मदद के रूप में दिया जाए।

सरकार का मानना है कि इससे खाद पर मिलने वाली सब्सिडी को धीरे-धीरे इनपुट सब्सिडी से आय सहायता में बदला जा सकेगा। इसका मकसद पिछले करीब 30 साल से चली आ रही असंतुलित खाद इस्तेमाल की समस्या को ठीक करना है, जिससे मिट्टी खराब हो रही है और फसलों की पैदावार पर असर पड़ रहा है।

यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल बना समस्या
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, भारत में किसान जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन यानी यूरिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश में खाद का एन-पी-के (नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश) अनुपात वर्ष 2009-10 में 4:3.2:1 था, जो 2023-24 में बिगड़कर 10.9:4.1:1 हो गया है। जबकि ज्यादातर फसलों और मिट्टी के लिए सही अनुपात करीब 4:2:1 माना जाता है। सस्ती यूरिया की वजह से किसान दूसरी जरूरी खादों की तुलना में इसका ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

मिट्टी और पैदावार पर बुरा असर
सर्वे में बताया गया है कि ज्यादा नाइट्रोजन डालने से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता घटती है, जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व खत्म होते हैं और मिट्टी की संरचना कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही भूजल में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ती है। कई सिंचित इलाकों में हालात ऐसे हो गए हैं कि खाद ज्यादा डालने के बावजूद पैदावार बढ़ नहीं रही, बल्कि कुछ जगहों पर इसमें गिरावट देखी जा रही है।

ये भी पढ़ें - सस्ती होने से यूरिया किसानों की पहली पसंद, बिक्री बढ़ी लेकिन उत्पादन घटा

क्या है नया सुझाव
सरकार का प्रस्ताव है कि यूरिया जैसी खाद की कीमतें धीरे-धीरे उनकी असली जरूरत और लागत के हिसाब से तय की जाएं। इसके साथ ही किसानों को खाद सस्ती देने के बजाय सीधी नकद सहायता दी जाए। जो किसान संतुलित मात्रा में खाद का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें इसका फायदा मिलेगा, जबकि ज्यादा यूरिया डालने वालों को संतुलित खाद, मिट्टी जांच, नैनो यूरिया और जैविक खाद की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा।

क्षेत्र और फसल के हिसाब से मदद
आर्थिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि धान-गेहूं और गन्ना वाले इलाकों में नाइट्रोजन की जरूरत ज्यादा होती है, जबकि दलहन और मोटे अनाज वाले वर्षा आधारित क्षेत्रों में इसकी जरूरत कम रहती है। इसलिए नकद मदद को इलाके और फसल के हिसाब से तय किया जाना चाहिए, ताकि सही किसानों को सही लाभ मिल सके।

डिजिटल सिस्टम से होगा लागू
सरकार का कहना है कि आधार से जुड़ी खाद बिक्री, पीएम-किसान और डिजिटल निगरानी प्रणाली की मदद से यह बदलाव व्यवहारिक और संभव है। पहले इसे कुछ इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा और अनुभव के आधार पर बाद में पूरे देश में इसका विस्तार किया जाएगा।सरकार ने साफ किया है कि मकसद खाद की खपत घटाना नहीं है, बल्कि उसे मिट्टी और फसल की जरूरत के मुताबिक सही करना है, ताकि लंबे समय में पैदावार बढ़े और किसानों की लागत कम हो।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— Economic Survey 2025-26: खाद नीति में बदलाव की जरूरत, यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल पर ब्रेक

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
agriculture newsEconomic Survey 2025-26fertilizer subsidyNews Potliurea
Pooja Rai

About the Author

Pooja Rai

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

Agribulletin
एग्री बुलेटिन

आलू किसानों को राहत से लेकर यूरिया की कीमत तक, इस हफ्ते की 6 बड़ी खबरें

इस हफ्ते के Agribulletin में किसानों से जुड़ी कई अहम खबरें शामिल हैं। इसमें आलू किसानों को कोल्ड स्टोरेज शुल्क में राहत, यूरिया की कीमत, एथेनॉल उत्पादन, गन्ने में प्लासी बोरर का खतरा, मौसम का हाल और मक्का, गेहूं व तुअर के ताजा बाजार भाव की जानकारी मिलेगी।

News Potli·16 Aug 2026
Agribulletin: नकली बीज-खाद से लेकर सोयाबीन रिसर्च और एथेनॉल नीति तक, जानिए खेती की बड़ी खबरें
एग्री बुलेटिन

Agribulletin: नकली बीज-खाद से लेकर सोयाबीन रिसर्च और एथेनॉल नीति तक, जानिए खेती की बड़ी खबरें

इस हफ्ते के Agribulletin में खेती-किसानी से जुड़ी कई अहम खबरों पर नजर डालेंगे। नकली बीज-खाद की शिकायत की हेल्पलाइन से लेकर Draft Seeds Bill 2025, भारत-अमेरिका की सोयाबीन रिसर्च, अरहर के T2T जीनोम और एथेनॉल नीति के अपडेट जानेंगे। साथ ही अलग-अलग राज्यों की किसान योजनाओं, मंडी भाव, फसल उत्पादन और मॉनसून की ताजा स्थिति की पूरी जानकारी मिलेगी।

Pooja Rai·09 Aug 2026
Agribulletin
एग्री बुलेटिन

MSP घोटाले से PM-Kisan तक, इस हफ्ते की 5 बड़ी कृषि खबरें Agri Bulletin में देखिए

इस हफ्ते के Agribulletin में कृषि जगत की बड़ी खबरें देखिए

Pooja Rai·02 Aug 2026
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs