नई दिल्ली। केंद्र सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) कार्यक्रम से किसानों की आय बढ़ाने, देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना की वजह से देश की खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है।
सरकार के मुताबिक, E20 कार्यक्रम से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके साथ ही 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात की जरूरत कम हुई है, 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आई है और किसानों व डिस्टिलरी को 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है। इससे किसानों को अपनी कृषि उपज के लिए एक स्थायी बाजार भी मिला है।
खाद्य सुरक्षा को दी गई प्राथमिकता
सरकार ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), अन्य कल्याणकारी योजनाओं और बफर स्टॉक की जरूरत पूरी होने के बाद ही अतिरिक्त (अधिशेष) अनाज का उपयोग किया जाता है। यानी गरीबों के लिए तय अनाज को इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल नहीं किया जाता।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन में टूटे हुए चावल, क्षतिग्रस्त अनाज और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अनाज का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कृषि अवशेषों से बनने वाले दूसरी पीढ़ी (2G) के इथेनॉल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि खाद्यान्न पर निर्भरता और कम हो।
FCI चावल को लेकर सरकार ने क्या कहा?
हाल के दिनों में यह दावा किया गया कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) का चावल कम कीमत पर इथेनॉल बनाने के लिए बेचा गया। इस पर सरकार ने कहा कि FCI का चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कई फीडस्टॉक में से केवल एक है। इसकी कीमत सरकार द्वारा तय नीति के अनुसार निर्धारित की जाती है।
सरकार के मुताबिक, इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2023-24 में इथेनॉल उत्पादन में FCI चावल की हिस्सेदारी सिर्फ 0.02% थी। ESY 2025-26 में यह बढ़कर 24.64% हुई, लेकिन यह केवल खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी होने के बाद उपलब्ध अधिशेष स्टॉक से ही संभव हुआ। इसी अवधि में मक्का की हिस्सेदारी 42.6% से घटकर 35.96% रह गई, जिससे साफ है कि इथेनॉल उत्पादन में उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग फीडस्टॉक का उपयोग किया जाता है।
पेट्रोल की कीमतों पर भी पड़ा असर
सरकार का दावा है कि यदि पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) नहीं होता, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के दौरान दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। लेकिन E20 मिश्रण की वजह से उपभोक्ताओं को 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल मिला। यानी उस समय पेट्रोल की कीमत में करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक की राहत मिली।
सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ पेट्रोल की कीमत कम करना नहीं है, बल्कि तेल आयात पर निर्भरता घटाना, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि उपज के लिए स्थायी बाजार तैयार करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है।





