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खेती किसानी

Dragon Fruit की बढ़ती मांग और खेती की बढ़ती संभावनाएं

ICAR के अनुसार देश में Dragon Fruit की खेती खास तौर पर कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में तेजी से बढ़ी है। 2025 की ICAR रिपोर्ट यह भी कहती है कि लगभग सभी राज्यों ने इस फसल को अपनाना शुरू किया है।

Pooja Rai

Pooja Rai·17 Sep 2026

Dragon Fruit की बढ़ती मांग और खेती की बढ़ती संभावनाएं

Dragon Fruit में पानी, फाइबर के साथ कई तरह के vitamins और minerals पाए जाते हैं। इसके गूदे और बीजों में antioxidant compounds भी होते हैं। यही वजह है कि इसे nutritious fruit के तौर पर देखा जाता है और इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत में इस फल ने लोगों का ध्यान खास तौर पर तब खींचा, जब 2021 में गुजरात सरकार ने Dragon Fruit का नाम बदलकर कमलम रखने का फैसला किया। इसके फूल के आकार को कमल से जोड़ते हुए यह नाम रखा गया।

Dragon Fruit की मांग बढ़ने का अंदाजा भारत के import आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। PIB के मुताबिक, 2021 में भारत ने करीब 15,491 टन Dragon Fruit का आयात किया था। वहीं, 2023 में PIB के अनुसार देश में इसकी खेती का क्षेत्र 3,000 हेक्टेयर से ज्यादा था। सरकार ने MIDH के तहत अगले पांच वर्षों में इसका खेती क्षेत्र बढ़ाकर 50,000 हेक्टेयर करने का लक्ष्य भी रखा था।

खेती की बात करें तो Dragon Fruit कैक्टस परिवार का पौधा है। इसलिए इसे दूसरी कई फल फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि कम पानी वाले इलाकों में भी किसान इसकी खेती को एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।CAR के अनुसार देश में Dragon Fruit की खेती खास तौर पर कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में तेजी से बढ़ी है। 2025 की ICAR रिपोर्ट यह भी कहती है कि लगभग सभी राज्यों ने इस फसल को अपनाना शुरू किया है।

आपको बता दें कि भारत सिर्फ Dragon Fruit का import ही नहीं करता, बल्कि इसका export भी करता है। यानी देश में इसकी खेती बढ़ने के साथ विदेशी बाजार में भी इसके लिए संभावनाएं हैं।

एक high-value fruit crop होने की वजह से Dragon Fruit की खेती से अच्छी कमाई की संभावना है, लेकिन खेती शुरू करने से पहले सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। खासकर उन किसानों को सुनना जरूरी है जो पहले से इसकी खेती कर रहे हैं।

वैसे तो NewsPotli ने देश के अलग-अलग राज्यों के ऐसे कई किसानों से बात की है, जो कमलम की खेती कर रहे हैं। लेकिन हम आपको ऐसे पांच किसानों के बारे में बताएंगे, जो Dragon Fruit की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। इन किसानों की खेती और उनके अनुभव से आपको कमलम की खेती के बारे में काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

कच्छ के Smith Dedhia: Technology से Dragon Fruit की खेती

सबसे पहले हम बात करेंगे एक ऐसे युवा किसान की, जिसने कमलम की खेती में सफलता हासिल की है। गुजरात के कच्छ के Smith Dedhia पढ़ाई और नौकरी के लिए मुंबई में रहने लगे थे, लेकिन बाद में उन्होंने कच्छ में अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती शुरू की। Smith ने Spain से MBA in Entrepreneurship की पढ़ाई की है, इसलिए खेती से जुड़े business को समझने में उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। उन्होंने technology और farming techniques को समझा और फिर कमलम की खेती शुरू कर दी।

Smith अपने खेत में high-density planting करते हैं और एक एकड़ में करीब 4,000 पौधे लगाए हैं। कच्छ में तेज हवाओं और cyclone से फसल को बचाना चुनौती है, इसलिए उन्होंने overhead trellis system लगाया है। खेती में Jain Irrigation का Venturi drip system, weather station और soil sensors का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पानी और खाद को बेहतर तरीके से manage किया जाता है।

Cyclone जैसी चुनौतियों के बावजूद Smith ने modern farming techniques की मदद से conventional तरीके की तुलना में production को दोगुना करने की कोशिश की है। साथ ही, पानी और मजदूरी की जरूरत को कम करने पर भी ध्यान दिया गया है। उनकी खेती यह दिखाती है कि सही technology और planning के साथ कमलम जैसी high-value फसल को एक अच्छे farming business के तौर पर किया जा सकता है।

भावनगर के जगदीश भाई: LED Light से off-season में Dragon Fruit

दूसरी कहानी भी गुजरात की है। गुजरात के भावनगर जिले के किसान जगदीश भाई देसाई ने कमलम की खेती में एक नया प्रयोग किया है। उन्होंने अपने खेत में LED लाइट लगाई है। उनका दावा है कि इससे उन्हें प्रति एकड़ 3 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हो रही है। उनका यह तरीका कोई जादू नहीं, बल्कि विज्ञान पर आधारित है। रात में कृत्रिम रोशनी देने से पौधे को ज्यादा समय तक light मिलती है, जिससे photosynthesis की प्रक्रिया को बढ़ावा देने में मदद मिलती है और off-season में भी उत्पादन लेने की कोशिश की जाती है।

जगदीश भाई ने खेती में सिर्फ LED लाइट ही नहीं, बल्कि organic farming और intercropping को भी अपनाया है। इससे कमलम की quality बेहतर करने के साथ-साथ दूसरी फसलों से extra income भी हो रही है। इस वीडियो में जानिए कि रात में LED लगाने का तरीका कैसे काम करता है, इसके लिए कितनी बिजली और खर्च आता है, organic farming से कमलम की quality में क्या फर्क पड़ता है और off-season में market demand का फायदा कैसे उठाया जा रहा है।

जम्मू के हरवंश चौधरी: आधा एकड़ से हजारों की कमाई से लाखों के मुनाफे तक

तीसरी कहानी उत्तर भारत के सबसे ऊपरी राज्य यानी जम्मू की है। जम्मू के किसान हरवंश चौधरी जम्मू के पहले किसानों में हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर Dragon Fruit की खेती शुरू की। हरवंश बताते हैं कि जब वह पारंपरिक खेती करते थे, तो आधा एकड़ जमीन से करीब 7 से 10 हजार रुपये की कमाई होती थी, लेकिन Dragon Fruit की खेती शुरू करने के बाद पिछले साल उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ यानी 11 कनाल जमीन से करीब 6 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। Dragon Fruit की खेती शुरू करने के पीछे उनकी एक खास कहानी भी है, जो आपको वीडियो में देखने को मिलेगी। जम्मू-कश्मीर में भी इस exotic fruit की मांग बढ़ रही है। हरवंश ने इसकी खेती के बारे में जानने के लिए हरियाणा से लेकर गुजरात तक का दौरा किया और जानकारी जुटाने के बाद खेती शुरू की। मुनाफा हुआ तो वह अपने खर्चे पर वियतनाम तक से Dragon Fruit के पौधे लेकर आए और अब आगे फिलीपींस या ताइवान जाने की तैयारी में हैं।

हरवंश खेती में technology के साथ-साथ देसी और जैविक तरीकों का भी इस्तेमाल करते हैं। 7 फीट के पिलर पर चार पौधे लगाकर उन्हें drip irrigation से पानी देते हैं। पौधों को पोषण देने के लिए घर पर तैयार की गई देसी tonic और बीमारी लगने पर मिर्च, हल्दी और नीम से बनी जैविक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। Dragon Fruit को तेज धूप और मौसम के असर से बचाने के लिए खेत में लाइन से green shade net भी लगाया गया है। बागवानी और खेती में उनके काम के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। खास बात यह है कि हरवंश खुद खेती करने के साथ दूसरे किसानों को भी Dragon Fruit की खेती के लिए फोन पर मुफ्त सलाह देते हैं।

बाराबंकी के गया प्रसाद: Dragon Fruit से 15 लाख रुपये तक कमाई का दावा

चौथी कहानी उत्तर प्रदेश की है। बाराबंकी जिले के मोहम्मद विशुनपुर के किसान गया प्रसाद मौर्य Dragon Fruit की खेती से सालाना प्रति एकड़ करीब 15 लाख रुपये तक कमाई का दावा करते हैं। उनके पास इस वक्त करीब 2 एकड़ में Dragon Fruit लगा है, जबकि एक एकड़ में नए पौधे लगाए गए हैं। गया प्रसाद बताते हैं कि उन्होंने गेहूं, धान, शतावरी, आलू, गोभी, गुलाब और ग्लैडियोलस जैसी कई फसलें उगाई हैं, लेकिन Dragon Fruit जैसा मुनाफा उन्हें किसी और फसल में नहीं मिला। उनके मुताबिक एक पौधे से मई से दिसंबर तक करीब 10-15 फल मिल सकते हैं और कई बार एक ही डाल पर 3-4 फल भी आ जाते हैं। इस तरह एक एकड़ से औसतन करीब 50 क्विंटल उत्पादन मिल जाता है। अगर भाव 300 रुपये किलो मिले तो करीब 15 लाख रुपये और 150 रुपये किलो के भाव पर भी करीब साढ़े 7 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। गया प्रसाद के मुताबिक पिछले पांच साल से उनकी फसल आसानी से बिक रही है, इसलिए उन्हें बाजार की कोई खास समस्या नहीं है।

गया प्रसाद बताते हैं कि Dragon Fruit की खेती में पहले साल लागत ज्यादा आती है। एक एकड़ में शुरुआती तौर पर करीब 3-4 लाख रुपये खर्च होते हैं, जिसमें पौधे, सीमेंट के पिलर और दूसरे सामान शामिल हैं। इसके बाद सालाना खर्च करीब 50-60 हजार रुपये रह जाता है। पौधे लगाने के करीब तीन साल बाद फल आना शुरू हो जाते हैं और एक बार पौधे तैयार हो जाएं तो करीब 20 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। Dragon Fruit को ज्यादा सर्दी छोड़कर अलग-अलग तरह के मौसम और मिट्टी में उगाया जा सकता है और इसमें पानी की जरूरत भी कम होती है। यही वजह है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में इसे एक climate-resilient crop के तौर पर भी देखा जा रहा है। इसकी खेती के लिए करीब 7 फीट ऊंचे सीमेंट के पिलर लगाए जाते हैं, जिनमें 2 फीट जमीन के अंदर और 5 फीट ऊपर रहता है और चारों तरफ चार पौधे लगाए जाते हैं। किसानों को अलग-अलग राज्यों में सरकारी योजनाओं के तहत मदद भी मिलती है। गया प्रसाद का कहना है कि अगर किसानों को खेती से अच्छी कमाई करनी है तो उन्हें पारंपरिक गेहूं-धान से आगे बढ़कर ऐसी high-value crops के बारे में भी सोचना होगा।

बिहार के सुधांशु कुमार: Modern Horticulture से करोड़ों का कारोबार

पांचवीं कहानी हम आपके लिए लेकर आए हैं बिहार से। बिहार के सबसे धनी और चर्चित किसानों में शामिल सुधांशु कुमार कई तरह के फलों की बागवानी के साथ Dragon Fruit की भी बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। समस्तीपुर के नयनागर में खेती करने वाले सुधांशु कुमार के फार्म में आम, लीची, केला, Dragon Fruit, मौसमी, नींबू, जामुन, इमली, स्ट्रॉबेरी और कटहल समेत कई फलों की खेती होती है। उनके फार्म में करीब 1.5 लाख फलदार पौधे हैं, जिनमें करीब 1 लाख केले के पौधे शामिल हैं। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उन्होंने modern horticulture को अपनाया और उनका सालाना कारोबार करीब 3-4 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

सुधांशु के फार्म की खास बात यह है कि यहां खेती में automatic drip irrigation, fertigation, sensors, weather station और CCTV जैसी technology का इस्तेमाल होता है। उनका मानना है कि खेती सिर्फ जमीन पर फसल उगाने का काम नहीं है, बल्कि मिट्टी, मौसम, पानी और फसल की जरूरत को समझकर करने वाला काम है। उनका फार्म दूसरे किसानों और students के लिए भी सीखने की जगह बन गया है, जहां अब तक 12 हजार से ज्यादा लोग खेती के तरीके देखने और समझने पहुंच चुके हैं।

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