केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey-DCS) का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। पिछले रबी सीजन में जहां4.41 लाख गांवों के 31.3 करोड़ खेतों का सर्वे किया गया था, वहीं इस बार खरीफ सीजन में5.53 लाख गांवों के 45 करोड़ खेतों का डिजिटल सर्वे किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इससे यह पता लगाने में आसानी होगी कि देशभर के किसान किस खेत में कौन-सी फसल उगा रहे हैं और कितने क्षेत्र में खेती की जा रही है।
20 राज्यों में बन चुकी हैं 10 करोड़ से ज्यादा Farmer ID
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक20 राज्यों में 10.15 करोड़ से अधिक Farmer ID बनाई जा चुकी हैं। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत मार्च 2027 तक11.62 करोड़ Farmer ID बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से करीब87 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
क्या है डिजिटल क्रॉप सर्वे?
डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत मोबाइल ऐप और डिजिटल तकनीक की मदद से खेतों में जाकर फसलों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इससे सरकार को लगभग रियल टाइम में जानकारी मिलती है कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल बोई गई है। इससे फसल उत्पादन का अनुमान लगाने और कृषि योजनाएं बनाने में मदद मिलती है।
किसानों को मिलेगी फसल से जुड़ी व्यक्तिगत सलाह
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, Farmer ID और डिजिटल डेटा तैयार होने के बाद किसानों को उनकी जमीन और फसल के अनुसार व्यक्तिगत खेती सलाह (Personalised Advisory) भी दी जाएगी। इससे किसानों को सही फसल चुनने, उन्नत खेती अपनाने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिलेगी।
सैटेलाइट से भी होगी निगरानी
सरकार डिजिटल सर्वे के आंकड़ों की रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट तकनीक के जरिए भी जांच करेगी, ताकि फसलों के रकबे और उत्पादन का सटीक आकलन किया जा सके।
कई राज्यों ने लक्ष्य से ज्यादा Farmer ID बनाई
तेलंगाना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने Farmer ID बनाने के मामले में अपने तय लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं पश्चिम बंगाल में Farmer ID बनाने का काम शुरू हो गया है, जबकि झारखंड, जम्मू-कश्मीर, गोवा और सिक्किम में यह प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चल रही है।
MSP खरीद में भी हो रहा इस्तेमाल
सरकार के अनुसार, Farmer ID और डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़ों का उपयोग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली सरकारी खरीद में भी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में सत्यापित किसान डेटा की मदद से धान खरीद में करीब5,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। उत्तर प्रदेश में गेहूं और ओडिशा में धान खरीद के दौरान भी इस डेटा का उपयोग किया गया।
किसानों को क्या होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे से खेती का सटीक रिकॉर्ड तैयार होगा, किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंचेगा, फसल उत्पादन का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा और भविष्य में किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार वैज्ञानिक सलाह भी दी जा सकेगी।





