गेहूं की खेती में अब सिर्फ ज्यादा पैदावार ही मायने नहीं रखती, बल्कि ऐसी किस्म भी जरूरी है जो बढ़ती गर्मी और पानी की कमी जैसी मौसम की चुनौतियों के बीच फसल को संभाल सके। इसी जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित की गई गेहूं की किस्म DBW 443 किसानों के बीच खास पहचान बना रही है। इसे ‘करण सान्वि’ के नाम से भी जाना जाता है। खास बात यह है कि इसमें अच्छी पैदावार के साथ प्रोटीन, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।
प्रोटीन, आयरन और जिंक की अच्छी मात्रा
DBW 443 गेहूं में करीब 13.4 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। वहीं, इसमें 41.9 PPM आयरन और करीब 43.0 PPM जिंक की मात्रा बताई गई है। यानी यह किस्म उत्पादन के साथ अनाज की पोषण गुणवत्ता पर भी ध्यान देती है।
गर्मी और सूखे में भी टिकने की क्षमता
बदलते मौसम में बढ़ती गर्मी और पानी की कमी गेहूं किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। DBW 443 को ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसमें गर्मी सहने और सूखे की स्थिति में टिके रहने की क्षमता बताई गई है, जिससे चुनौतीपूर्ण मौसम में भी फसल का उत्पादन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
ICAR की गेहूं अनुसंधान व्यवस्था के तहत विकसित
DBW 443 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़ी गेहूं अनुसंधान व्यवस्था के तहत विकसित किया गया है। इस किस्म में उत्पादन, पोषण और बदलते मौसम के प्रति सहनशीलता तीनों पहलुओं पर ध्यान दिया गया है।





