सुबह की चाय से लेकर देश-विदेश के बाजार तक पहुंचने वाली बंगाल की मशहूर चाय अब कई चुनौतियों से जूझ रही है। खासकर दार्जिलिंग की चाय का उत्पादन पिछले कुछ दशकों में काफी घट गया है। ऐसे में चाय उद्योग को फिर मजबूत करने के लिए इंडियन टी एसोसिएशन (ITA) ने पश्चिम बंगाल सरकार के सामने कई सुझाव रखे हैं।
ITA ने दार्जिलिंग, डुआर्स और तराई के चाय क्षेत्रों को फिर से मजबूत करने के लिए दो विस्तृत व्हाइट पेपर सरकार को सौंपे हैं। इनमें चाय बागानों की आर्थिक स्थिति सुधारने, पुरानी चाय की झाड़ियों को बदलने, मशीनों और फैक्ट्रियों को आधुनिक बनाने और किसानों-कामगारों की आजीविका मजबूत करने के उपाय सुझाए गए हैं।
दार्जिलिंग चाय का उत्पादन आधे से भी कम
ITA के मुताबिक, दार्जिलिंग चाय का उत्पादन 1990 में 1.449 करोड़ किलो था, जो 2025 में घटकर करीब 56 लाख किलो रह गया। यानी करीब 35 साल में उत्पादन आधे से भी कम हो गया है।
दार्जिलिंग की चाय को उसकी खास पहचान के लिए GI टैग मिला हुआ है। ITA का कहना है कि इस पहचान और चाय उद्योग को बचाने के लिए जल्द और तय समय में सरकारी कदम उठाने की जरूरत है।
हर साल ₹113 करोड़ के पैकेज का सुझाव
ITA ने दार्जिलिंग चाय उद्योग के लिए करीब ₹113 करोड़ के सालाना वित्तीय सहायता पैकेज का सुझाव दिया है। इसमें चाय उत्पादन, कामकाजी पूंजी पर ब्याज सहायता, परिवहन, मशीनों के इस्तेमाल, सामाजिक सुरक्षा, पुराने बागानों को फिर से तैयार करने और फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण जैसे काम शामिल हैं।
इसके अलावा दार्जिलिंग चाय उद्योग को सीजनल इंडस्ट्री का दर्जा देने की भी मांग की गई है।
पुरानी चाय झाड़ियों और फैक्ट्रियों को बदलने पर जोर
ITA ने दार्जिलिंग, डुआर्स और तराई में कई पुराने चाय बागानों को फिर से विकसित करने की जरूरत बताई है। इसके साथ ही चाय बनाने वाली फैक्ट्रियों को आधुनिक बनाने, नई तकनीक अपनाने और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को चाय बागानों से जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
चाय पर्यटन और दूसरे कारोबारों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है, ताकि इन क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए साधन बन सकें।
चाय की कीमत और एक्सपोर्ट को लेकर भी मांग
ITA ने चाय उद्योग को बाजार में बेहतर दाम दिलाने के लिए बनी हुई चाय की न्यूनतम टिकाऊ कीमत तय करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा ऑर्थोडॉक्स चाय के लिए न्यूनतम आयात मूल्य और चाय निर्यात पर मिलने वाली RoDTEP सहायता बढ़ाने की मांग की गई है।
रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) चाय पर GST को भी तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया गया है।
ITA का कहना है कि अगर सरकार समय पर इन उपायों पर काम करती है, तो दार्जिलिंग, डुआर्स और तराई के चाय उद्योग को फिर से मजबूत किया जा सकता है, जिससे उद्योग के साथ हजारों कामगारों और स्थानीय परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिलेगा।
ये भी देखें-





