इस साल मानसून की धीमी शुरुआत के कारण देश में कपास की बुवाई करीब 20 से 30 दिन तक पीछे चल रही थी। लेकिन अब अच्छी बारिश होने से किसानों ने तेजी से बुवाई शुरू कर दी है। यही वजह है कि देश में कपास का रकबा 100 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगस्त में मौसम साथ देता रहा तो इस बार कपास की बुवाई पिछले साल से भी अधिक हो सकती है।
रोज 50 हजार हेक्टेयर में हो रही है बुवाई
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की फसल समिति के अध्यक्ष अतुल गनात्रा के अनुसार, अभी देश में हर दिन करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हो रही है। पिछले छह दिनों में हुई अच्छी बारिश से उन इलाकों में भी बुवाई शुरू हो गई है, जहां पहले बारिश की कमी के कारण किसान इंतजार कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि मानसून देर से आने के कारण इस बार बुवाई की अवधि भी बढ़ गई है और अब 25 अगस्त तक कपास की बुवाई की जा सकेगी। उनका कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो 20 अगस्त तक 120 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
कुछ राज्यों में बढ़ा रकबा, कुछ जगह अभी भी पिछड़ रही बुवाई
राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर मिली-जुली है। आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में 31 प्रतिशत बढ़ा है। तेलंगाना में भी करीब 4 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं मध्य प्रदेश में भी कपास की बुवाई पिछले साल से थोड़ी अधिक हुई है।
गुजरात में हाल की बारिश और राज्य सरकार द्वारा किसानों को 14 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता देने से बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि 27 जुलाई तक यहां करीब 20 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी, जो पिछले साल के 20.16 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है।
दूसरी ओर महाराष्ट्र में कपास का रकबा घटा है। यहां 27 जुलाई तक 35.76 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह 37.89 लाख हेक्टेयर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य के कुछ किसानों ने इस बार कपास की जगह मक्का की खेती को प्राथमिकता दी है।
फसल की स्थिति फिलहाल अच्छी
विशेषज्ञों के मुताबिक, देर से बुवाई होने के बावजूद फिलहाल कपास की फसल अच्छी स्थिति में है। उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में करीब 15 लाख हेक्टेयर में पहले बोई गई कपास की फसल सितंबर के पहले सप्ताह से मंडियों में आना शुरू हो सकती है।
कर्नाटक के रायचूर और आंध्र प्रदेश के आदोनी जैसे इलाकों में भी हाल की बारिश के बाद फसल की स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि कुछ वर्षा आधारित क्षेत्रों में देर से बारिश होने के कारण पौधों की ऊंचाई पर असर पड़ सकता है, लेकिन अधिक रकबे में बुवाई होने से उत्पादन पर इसका असर काफी हद तक कम हो सकता है।
कुछ इलाकों को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार
महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र में फसल की स्थिति फिलहाल संतोषजनक बताई जा रही है, लेकिन वहां अब भी अच्छी बारिश की जरूरत है। किसानों का कहना है कि यदि अगस्त में पर्याप्त बारिश हुई तो फसल बेहतर होगी। हालांकि इस क्षेत्र में भी इस बार कपास का रकबा 5 से 10 प्रतिशत तक कम रहने का अनुमान है, क्योंकि कई किसानों ने मक्का की खेती को चुना है।
कपास उद्योग को भी मिलेगी राहत
अगर मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा और बुवाई का रकबा 120 लाख हेक्टेयर के आसपास पहुंच गया, तो इसका फायदा सिर्फ किसानों को ही नहीं बल्कि कपड़ा उद्योग को भी मिलेगा। अधिक उत्पादन होने से जिनिंग मिलों, स्पिनिंग उद्योग और कपास कारोबार से जुड़े व्यापारियों को पर्याप्त कच्चा माल मिलने की संभावना बढ़ेगी।
अगस्त का मौसम करेगा तस्वीर साफ
फिलहाल कपास की खेती के लिए सबसे अहम महीना अगस्त माना जा रहा है। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती रही, तो न सिर्फ बुवाई का लक्ष्य पूरा होगा बल्कि उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है। ऐसे में इस साल कपास का सीजन किसानों और टेक्सटाइल उद्योग, दोनों के लिए राहत लेकर आ सकता है।





