भारत में 2026-27 सीजन के दौरान कपास उत्पादन को लेकर अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट में अहम अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजन में देश का कपास उत्पादन पिछले अनुमान की तुलना में कमजोर रह सकता है। इसकी बड़ी वजह कम बारिश और कपास की उपज में संभावित गिरावट बताई गई है। वहीं, कपड़ा और परिधान क्षेत्र में मांग बढ़ने से घरेलू कपास मिलों की खपत भी बढ़ने का अनुमान है।
24.5 मिलियन गांठ रह सकता है उत्पादन
USDA की Foreign Agricultural Service (FAS) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026-27 सीजन में कपास का उत्पादन करीब 24.5 मिलियन 480-पाउंड गांठ रहने का अनुमान है। इस दौरान कपास की खेती लगभग 11.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कपास की औसत उपज करीब 2 फीसदी घटकर 464 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान लगाया गया है। यानी खेती का क्षेत्र बहुत ज्यादा बदलने की उम्मीद नहीं है, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादन पर मौसम का असर पड़ सकता है।
अगस्त-सितंबर में कम बारिश की चिंता
कपास की फसल के लिए मौसम इस समय सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी और मध्य भारत के कपास उत्पादक क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
इन इलाकों में लंबे समय तक बारिश न होने यानी सूखे जैसे हालात बनने का खतरा बताया गया है। इससे कपास की फसल की बढ़वार और उपज प्रभावित हो सकती है।
मानसून की कमी 12 फीसदी
हालांकि, 12 अगस्त तक देश में मानसून की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इस तारीख तक संचयी मानसूनी कमी घटकर सामान्य से 12 फीसदी कम रह गई थी। इसके बावजूद कपास की बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब 2 फीसदी पीछे चल रही थी।
वहीं, देश के जलाशयों में पानी का भंडारण उनकी कुल क्षमता का करीब 60 फीसदी है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश कपास की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
कपास की घरेलू खपत बढ़ने का अनुमान
USDA ने 2026-27 के लिए भारत में कपड़ा मिलों द्वारा कपास की खपत का अनुमान बढ़ाकर 26.2 मिलियन गांठ कर दिया है। इसकी मुख्य वजह टेक्सटाइल और गारमेंट के बढ़ते निर्यात ऑर्डर हैं।
कपास की कीमतों को मिल सकता है सपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, MSP में बढ़ोतरी और फसल की कमजोर संभावनाएं कपास की कीमतों को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। अगर उत्पादन अनुमान के मुताबिक कम रहता है और बाजार में मांग बनी रहती है, तो किसानों को कपास के बेहतर भाव मिलने की संभावना बन सकती है।
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