गन्ना किसानों को चीनी मिलों में गन्ने की रिकवरी, वजन में कटौती और भुगतान से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि एक सप्ताह के भीतर इस कमेटी का गठन किया जाएगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों के साथ किसान संगठनों, चीनी मिलों के प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा।
कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों के साथ हुई बैठक
12 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक की। इसमें किसानों ने गन्ने की रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन में कटौती, गन्ने की बर्बादी और लैब में जांच से जुड़ी समस्याएं उठाईं।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के साथ किसी भी तरह का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि गन्ने की रिकवरी और वजन की जांच के लिए पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का सही हिसाब मिल सके।
रिकवरी और वजन की जांच करेगी कमेटी
सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी मापने के वैज्ञानिक तरीकों, लैब में जांच और वजन की शुद्धता जैसे मुद्दों की समीक्षा करेगी। कमेटी तय समय में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक में गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने की प्रक्रिया और लागत के आकलन के बारे में भी जानकारी दी।
सरकार के मुताबिक, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने के साथ-साथ लंबे समय के लिए भी सुधार किए जाएंगे, ताकि गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।





