नई दिल्ली: देश में खेती में इस्तेमाल होने वाली नई बायोटेक्नोलॉजी (जैव प्रौद्योगिकी) को बढ़ावा देने के लिए नियमों को आसान और आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का कहना है कि अगर नई तकनीकों को समय पर मंजूरी मिलेगी, तो किसानों को बेहतर बीज मिलेंगे, फसलों की पैदावार बढ़ेगी और जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान से निपटने में भी मदद मिलेगी।
इसी मुद्दे पर ICAR, ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) और फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) ने एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। इसमें 80 से ज्यादा कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हुए।
ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि देश में ऐसे नियम होने चाहिए जो नई तकनीकों के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि विज्ञान के आधार पर फैसले लिए जाएं ताकि किसानों तक नई तकनीक जल्दी पहुंच सके।
फिलहाल भारत में बायोटेक फसलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में कई सरकारी एजेंसियां शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नई जीन एडिटिंग तकनीकों, जैसे CRISPR, के आने के बाद मौजूदा नियमों की समीक्षा करना जरूरी हो गया है।
बैठक में सुझाव दिया गया कि मंजूरी की प्रक्रिया को पारदर्शी, आसान और तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। इससे सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा विकसित नई कृषि तकनीकें जल्द किसानों तक पहुंच सकेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित बायोटेक फसलों के इस्तेमाल से फसल उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और भारतीय कृषि वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।





