शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश)। बिहार के गन्ना किसान अब गन्ने की खेती में नई तकनीक अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए बिहार के 20 किसान उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित गन्ना शोध परिषद पहुंचे हैं। यहां किसानों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। इसमें उन्हें गन्ने की खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और नई किस्मों की जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण में किसानों को टिशूकल्चर, सिंगल बड, एसटीपी और ट्रेंच विधि से गन्ने की खेती के बारे में बताया जा रहा है। इसके अलावा किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज गन्ने की तैयारी, गन्ने की नई किस्मों की पहचान और खेती में मशीनों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि किसानों को गन्ने की खेती की शुरुआत से लेकर फसल की कटाई तक की आधुनिक तकनीक सिखाई जाएगी। इसमें गन्ने की बुवाई, खाद-पानी का सही इस्तेमाल, फसल की देखभाल और बेहतर उत्पादन लेने के तरीके शामिल हैं। किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

खेत में ले जाकर दी जा रही जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सिर्फ कक्षा में जानकारी नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें खेत में ले जाकर भी गन्ने की विभिन्न किस्मों के बारे में बताया जा रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. अरविन्द कुमार ने किसानों को अलग-अलग गन्ना किस्मों की पहचान और उनकी खासियतों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने किसानों से अपील की कि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाएं और दूसरे किसानों को भी इनके बारे में बताएं।
बिहार से इस साल आएंगे 10 किसान दल
शोध परिषद के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि इस साल बिहार से कुल 10 किसान प्रशिक्षण दल शाहजहांपुर आएंगे। भागलपुर, आरा, मोतिहारी और पूर्णिया समेत अलग-अलग जिलों के किसानों को भी यहां प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बिहार में बढ़ेगा गन्ने का रकबा
बिहार सरकार गन्ने की खेती और चीनी उद्योग को बढ़ावा देने पर भी काम कर रही है। सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 2.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती का लक्ष्य रखा है। इससे करीब 1.74 करोड़ टन गन्ना उत्पादन का लक्ष्य है।
5 साल में 25 नई चीनी मिलें लगाने की योजना
बिहार सरकार राज्य के पुराने चीनी उद्योग को फिर से मजबूत करने की तैयारी में है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की योजना है। इसमें मधुबनी की सकरी और दरभंगा की रैयाम चीनी मिल भी शामिल हैं।
फिलहाल बिहार के पांच जिलों में चीनी मिलें चल रही हैं। इनमें पश्चिम चंपारण में सबसे ज्यादा पांच मिलें हैं। इसके अलावा गोपालगंज में दो और समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण तथा सीतामढ़ी में एक-एक चीनी मिल संचालित है।
सरकार की कोशिश है कि किसानों को नई तकनीक और बेहतर किस्मों की जानकारी देकर गन्ने की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाई जाए, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो।
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